पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

ममता बनर्जी की सरकार बोलेगी माओवादियों पर हमला

ममता बनर्जी की सरकार बोलेगी माओवादियों पर हमला

कोलकाता. 18 अक्टूबर 2011

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी माओवादियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई के लिये तैयार हो रही हैं. एक सप्ताह के भीतर हथियार डालने की उनकी चेतावनी के बाद अब उन्होंने केन्द्र सरकार से अर्धसैनिक बलों की दो और बटालियन की मांग की है. समझा जा रहा है कि माओवादियों को हथियार डालने की उनकी मियाद 22 अक्टूबर को पूरा होने के बाद राज्य में कभी भी माओवादियों के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन शुरु किया जा सकता है.

माओवादी


खबर है कि ममता बनर्जी ने गृह मंत्रालय से अर्धसैनिक बलों की दो और बटालियन की मांग की है. फिलहाल राज्य में माओवादियों से लड़ने के लिये अर्धसैनिक बल के छह बटालियन पहले से ही हैं. राज्य में उनका इस्तेमाल नहीं होने से नाराज केन्द्र सरकार ने बंगाल सरकार से एक बटालियन छत्तीसगढ़ भेजे जाने का निर्देश दिया था. लेकिन अब ऑपरेशन के मद्देनज़र ममता बनर्जी ने दो और बटालियन की मांग रखी है.

ज्ञात रहे कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जंगलमहल में एक सभा को संबोधित करते हुये नक्सलियों को साफ चेतावनी देते हुये कहा था कि, "हमने शांति प्रक्रिया शुरू की है. पिछले चार महीनों से संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हमने सोचा था कि यह कदम कारगर होगा. लेकिन हमें हत्याएं देखने को मिल रही हैं".

ममता बनर्जी अपने भाषण में कहा कि "हम शांति चाहते हैं. हम बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन आपको हथियार त्यागना होगा. मैं आप सबको सात दिनों का समय देती हूं. इस पर विचार कीजिए. यदि आप समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं तो फिर कोई मुद्दा नहीं है. हम चाहते हैं कि बातचीत का दरवाजा खुला रहे. यह अंतिम मौका है. रक्तपात और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते."

ममता बनर्जी की इस चेतावनी पर आश्चर्य जताते हुये माओवादी विचारक और कवि वरवरा राव ने कहा था कि सरकार ने चुनाव में आदिवासियों के मुद्दे पर कई वायदे किये थे लेकिन उनमें से एक भी वादा सरकार ने पूरा नहीं किया. सरकार ने एक तरफ तो शांति वार्ता की पेशकश की, दूसरी ओर सुरक्षा बलों का संयुक्त ऑपरेशन और तेज कर दिया. ऐसे में किसी बेहतर परिणाम की उम्मीद नहीं की जानी चाहिये. बाद में माओवादियों की ओर से भी इसी तरह के बयान सामने आये.

समझा जा रहा है कि माओवादियों के इस बयान के बाद ममता बनर्जी की सरकार माओवादियों से आर-पार की लड़ाई के मूड में है. इधर माओवादी समर्थक कही जाने वाली कमेटी ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गनाइजेशन के संयोजक आशिष गुप्ता ने ममता बनर्जी के सामने तीन शर्तें रखी हैं. गुप्ता के अनुसार- हम अर्धसैनिक बलों की वापसी, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और माओवादियों से बातचीत की पहल की मांग कर रहे हैं.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in