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कलावती की बेटी ने गरीबी के कारण की आत्महत्या

कलावती की बेटी ने गरीबी के कारण की आत्महत्या

मुंबई. 18 अक्टूबर 2011


तीन साल पहले राहुल गांधी ने संसद में विदर्भ की जिस कलावती का जिक्र अपने भाषण में करके उसे मशहूर बना दिया था, उसकी बेटी ने पिछले दिनों पैसों की तंगी के कारण खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली. कभी अखबारों की सुर्खियों में जगह पाने वाली कलावती की बेटी की मौत के 20 दिन बाद उसकी खबर स्थानीय दैनिकों में छपी.

कलावती


रालेगांव में रहने वाली सविता दिवाकर ने पुलिस को बताया कि उसके पास अपनी बीमारी के इलाज के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने खुद को आग लगा ली. राहुल गांधी विदर्भ में किसानों की आत्महत्या की खबरें सुनकर यवतमाल जिले के जल्का गांव में रहने वाली कलावती के घर गए थे.

सात बेटियों और दो बेटों की मां कलावती के पति ने कर्ज के कारण 2005 में आत्महत्या कर ली थी जबकि पिछले साल उसके कर्ज में डूबे जवाई संजय कालस्कर ने आत्महत्या कर ली थी. संसद में राहुल गांधी द्वारा कलावती के मार्मिक वर्णन वाले उक्त भाषण के बाद खबरों में आई कलावती पर मदद की बरसात हुई और सुलभ इंटरनेशनल के बिंदेश्वरी पाठक ने मेग्सेसे पुरस्कार से मिली 25 लाख की रकम उसे दान कर दी थी जिसे उसके नाम से बैंक में जमा करवा दिया गया, जिसमें से हर महीने 25 हजार रुपये उसे ब्याज भी मिलता है, और स्थानीय संगठन के कार्यकर्ता किशोर तिवारी के मुताबिक कलावती यह ब्याज लेती भी है. लेकिन 2009 का चुनाव जीतने के बाद से राहुल गांधी विदर्भ के किसानों को भूलकर बुंदेलखंड के किसानों का दुखदर्द बांटने लगे जहां आगामी चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री मायावती को मात देनी है.

विदर्भ में किसानों का प्रतिनिधित्व कर रहे जन आंदोलन के किशोर तिवारी ने कलावती की बेटी द्वारा गरीबी के कारण मौत पर ताज्जुब व्यक्त करते हुए कहा कि इससे लगता है कि कलावती अपने परिवार के कब्जे में है. तिवारी ने कहा कि झुलसी हुई सविता को चंद्रपुर के सरकारी अस्पताल में दाखिल किया गया जहां उसकी की 26 सितम्बर को मौत हुई, लेकिन मराठी दैनिक लोकमत और सकाल में उसकी मौत की खबर 15 अक्टूबर को छपी.

तिवारी ने कहा कि एक जनहित याचिका के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और परामर्श की मांग करने वाले परिवारों की पहचान करने के लिए राज्य सरकार ने 2006 में घर घर जाकर सर्वे किया था, लेकिन पांच साल बाद भी राज्य सरकार भुखमरी का सामना कर रहे 10 लाख परिवारों को राहत देने में नाकाम रही है.

कलावती की बेटी, पैसों के अभाव में आत्महत्या करने वाली अकेली नहीं है. तिवली गांव के एक किसान की 26 वर्षीय पत्नी उज्जवला बटकल भी है जिसने अपने 6 और 2 बरस के बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली थी. इसके अलावा यवतमाल और अमरावती जिलों के एक एक व्यक्तियों ने भी आत्महत्या की है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Rajesh Singh Sisodia [nangepaon@gmail.com] Ambikapur Chhattisgarh - 2011-10-23 23:20:44

 
  Very nice article unveiling reality of Rahul Gandhi.Congratulations for this article. 
   
 

jitendra choubey [neermanmegh@rediffmail.com] patna(bihar) ,India - 2011-10-19 06:33:08

 
  इस समाचार से मैं स्तब्ध हूं. keep it up and must share this kind of report!!! really it was distressing. 
   
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