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कर्नल गद्दाफी मारे गये ?

कर्नल गद्दाफी मारे गये ?

नई दिल्ली. 20 अक्टूबर 2011


लीबिया के अपदस्थ नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के पकड़े जाने की रिपोर्टें आ रही हैं. सिर्त में पिछले कई दिनों से लड़ाई चल रही है और गुरुवार की शाम ख़बरें आईं कि गद्दाफ़ी पकड़े गए हैं. कुछ एजेंसियों ने कर्नल गद्दाफी के मारे जाने की बात कही है.

गद्दाफी


लीबिया में 1960 के दशक में राजा के खिलाफ क्रांति हुई. राजा का तख्ता पलट हो गया. क्रांति की मदद से सैन्य अधिकारी कर्नल मुअम्मर गद्दाफी को देश की बागडोर मिल गई. एक सितंबर 1969 को गद्दाफी सत्तासीन हुए.

कर्नल मुअम्मर गद्दाफी ने लिबिया पर कुल 41 साल तक राज किया है और वे किसी अरब देश में सबसे अधिक समय तक राज करने वाले तानाशाह के रुप में जाने जाते रहे हैं. उन्होंने अपने को क्रांति का प्रथप्रदर्शक और राजाओं का राजा घोषित कर रखा था.

गद्दाफी के दावों पर यकीन करें तो उनके दादा अब्देसलम बोमिनियार ने इटली द्वारा लिबिया को कब्जा करने की कोशिश के दौरान लड़ाई लड़ी थी और 1911 के युद्ध में मारे गये थे. वे उस युद्ध के पहले शहीद थे.

गद्दाफी ने 1952 के आसपास मिस्र के राष्ट्रपति गमल अब्देल नसीर से प्रेरणा ली और 1956 मंउ इजराइल विरोधी आंदोलन में भाग भी लिया. मिस्र में ही उन्होंने अपनी पढ़ाई भी की. 1960 के शुरुवाती दिनों में गद्दाफी ने लिबिया की सैन्य अकादमी में प्रवेश लिया, जिसके बाद उन्होंने यूरोप में अपनी शिक्षा ग्रहण की और जब लिबिया में क्रांति हुई तो उन्होंने लिबिया की कमान संभाली.

गद्दाफी के विरोधियों का कहना है कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफी भी राजा की तरह खुद को लीबिया का सर्वे सर्वा समझने लग गये. आरोप है कि भ्रष्टाचार के जरिए गद्दाफी ने अकूत संपत्ति कमाई और विदेशी बैंकों में जमा किया.

बाद में पिछले साल दिसंबर में ट्यूनीशिया की राजनीतिक क्रांति ने गद्दाफी की भी जड़ें हिला दी. ट्यूनीशिया के बाद मिस्र में प्रदर्शन हुए. वहां हुस्नी मुबारक को जाना पड़ा. मोरक्को के राजा ने जनता के गुस्से को भांपते हुए जनमत संग्रह कराया. गद्दाफी अपनी जनता का मूड नहीं भांप सके और अरब की क्रांति की भेंट चढ़ गए.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

akash mishra [] sitapur - 2011-10-21 09:16:44

 
  बहुत अच्छा हुआ है. तानाशाह का अंत हुआ है. 
   
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