पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >मुद्दा >बात Print | Share This  

नरेंद्र मोदी पर हो सकता है मुकदमा

नरेंद्र मोदी पर हो सकता है मुकदमा

नई दिल्ली. 23 अक्टूबर 2011

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं. 2002 में हुये दंगों में मारे गये पूर्व सांसद एहसान जाफरी के मामले में न्याय मित्र राजू रामचंद्रन की रिपोर्ट के आधार पर मोदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. इस रिपोर्ट का आधार इतना मजबूत है कि नरेंद्र मोदी का इससे बच पाना मुश्किल नजर आ रहा है.

नरेंद्र मोदी


ज्ञात रहे कि 2002 के गुजरात दंगों में गुलबर्ग सोसायटी जनसंहार में जाफरी सहित 37 लोग मारे गए थे. उग्र भीड़ ने अहमदाबाद के करीब स्थित गुलबर्ग सोसायटी के मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया था और उन्हें आग के हवाले कर दिया था.

पूर्व सांसद एहसान जाफरी की मौत के बाद उनकी पत्नी जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके बाद कोर्ट ने मामले में राजू रामचंद्रन को एमिकस क्यूरी यानी न्याय मित्र नियुक्त किया था. सूत्रों के मुताबिक राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की है.

इससे पहले एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मुख्यमंत्री मोदी को क्लीन चिट दे दी थी. एसआईटी ने मोदी के खिलाफ केस दर्ज न करने की सिफारिश की थी.

सूत्रों के मुताबिक एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने इसपर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है. रिपोर्ट में एसआईटी से अलग राय जाहिर की गई है. कहा जा रहा है कि राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि संजीव भट्ट समेत उन अफसरों से पूछताछ के बाद ही ये तय हो सकता है कि मोदी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए या नहीं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2002 दंगे के दौरान जिन पुलिस अधिकारियों ने ड्यूटी सही से नहीं निभाई थी उनपर भी कार्रवाई की जानी चाहिए. जिन्होंने नरोदा पाटिया और गुलबर्ग सोसायटी में हुए दंगे को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए थे.

इससे पहले सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में जाकिया की याचिका पर सुनवाई करने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मजिस्ट्रे ट पर निर्भर करता है कि वह दंगे मामले में मोदी और 63 अन्यस के खिलाफ अदालती कार्यवाही आगे बढ़ाते हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह अब इस मामले की जांच पर आगे से निगरानी नहीं रखेगी.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in