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गद्दाफी को मिसराता के पास दफनाया गया

गद्दाफी को मिसराता के पास दफनाया गया

मिसराता. 25 अक्टूबर 2011


लीबिया की अंतरिम सरकार ने दावा किया है कि कर्नल गद्दाफ़ी के शव को मंगलवार की सुबह अज्ञात जगह पर दफ़ना दिया गया है. लेकिन एक प्रवक्ता का कहना है कि कर्नल गद्दाफी उनके बेटे मुअत्तसिम और यूनिस को जहां दफनाया गया है, वह जगह मिसराता शहर से दूर नहीं है.

गद्दाफी दफन


अंतरिम सरकार के अधिकारियों का कहना है कि जिस समय उन्हें दफनाया गया, उनके कुछ रिश्तेदार और अंतरिम प्रशासन के अधिकारी वहां उपस्थित थे. मिसराता काउंसिल के प्रवक्ता इब्राहम बेतलमल का कहना है कि कर्नल गद्दाफी को जहां दफन किया गया है, वह मिसराता शहर से दूर नहीं है.

सबसे पहले तीनों शवों को इस्लामिक परंपरा के अनुसार नहलाया गया. उसके बाद कर्नल गद्दाफी के भतीजे और अबू बकर के बेटे ने इन शवों को दफन करने से पहले की सारी प्रक्रिया पूरी की. इसके अलावा एक मुस्लिम विद्वान भी दफन करने वाली जगह में उपस्थित थे. कर्नल गद्दाफ़ी का परिवार चाहता था कि उन्हें सिर्त के पास दफ़नाया जाए. इसके अलावा कर्नल गद्दाफी ने अपनी वसीयत में भी यह इच्छा व्यक्त की थी कि उन्हें उनके परिजनों के साथ सिर्त में ही दफन किया जाये.

अधिकारियों का कहना था कि गुरुवार को गद्दाफी की मौत के बाद पिछले 5 दिनों में उनका शव खराब होने लगा था. गौरतलब है कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफी को गुरुवार की सुबह नाटो सैनिकों और विद्रोहियों ने सिर्त में पकड़ कर मार डाला था.

कर्नल मुअम्मर गद्दाफी ने लिबिया पर कुल 41 साल तक राज किया था और वे किसी अरब देश में सबसे अधिक समय तक राज करने वाले तानाशाह के रुप में जाने जाते थे. उन्होंने अपने को क्रांति का प्रथप्रदर्शक और राजाओं का राजा घोषित कर रखा था. गद्दाफी का कहना था कि उनके दादा अब्देसलम बोमिनियार ने इटली द्वारा लिबिया को कब्जा करने की कोशिश के दौरान लड़ाई लड़ी थी और 1911 के युद्ध में मारे गये थे. वे उस युद्ध के पहले शहीद थे.

गद्दाफी ने 1952 के आसपास मिस्र के राष्ट्रपति गमल अब्देल नसीर से प्रेरणा ली और 1956 मंउ इजराइल विरोधी आंदोलन में भाग भी लिया. मिस्र में ही उन्होंने अपनी पढ़ाई भी की. 1960 के शुरुवाती दिनों में गद्दाफी ने लिबिया की सैन्य अकादमी में प्रवेश लिया, जिसके बाद उन्होंने यूरोप में अपनी शिक्षा ग्रहण की और जब लिबिया में क्रांति हुई तो उन्होंने लिबिया की कमान संभाली.

गद्दाफी के विरोधियों का कहना है कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफी भी राजा की तरह खुद को लीबिया का सर्वे सर्वा समझने लग गये. आरोप है कि भ्रष्टाचार के जरिए गद्दाफी ने अकूत संपत्ति कमाई और विदेशी बैंकों में जमा किया.


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