पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >उड़ीसा Print | Share This  

डूब जाएंगे कोलकाता, ढ़ाका और...

डूब जाएंगे कोलकाता, ढ़ाका और...

लंदन. 27 अक्टूबर 2011


अगर मौसम का यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में कोलकाता शहर डूब सकता है. इसके अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश के ढ़ाका और चटगांव पर भी खतरा मंडरा रहा है. गरमा रही धरती का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो दुनिया के कई देश समुद्र का जल स्तर ऊपर उठने के कारण डूब के शिकार हो सकते हैं.

कोलकाता डूबेगा


जलवायु परिवर्तन को लेकर पिछले कई सालों से काम रही लंदन की मैपलक्राफ्ट कंपनी ने अपने अध्ययन के बाद जारी रिपोर्ट में दावा किया है कि कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और दिल्ली दुनिया के उन 10 शहरों में शामिल हैं, जहां प्रदूषण के कारण हालत खराब है. मैपलक्राफ्ट ने इन शहरों को हाई रिस्क वाले शहरों में रखा है. लेकिन कोलकाता के सामने समुद्री जलस्तर बढ़ जाने के कारण डूबने का खतरा मंडरा रहा है.

अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में बढ़ते तापमान के कारण समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ऐसे में समुद्र के किनारे बसे शहरों के डूबने का खतरा भी बढ़ रहा है. अध्ययन में सबसे ज्यादा खतरे वाले शहरों को शून्य से 10 अंक तक दिये गये हैं. इसके तहत सबसे खतरे वाले शहर ढाका को 1.06 अंक मिले हैं, वहीं चटगांव को 1.26 अंक दिया गया है. कोलकाता को 2.16 अंक दिया गया है.

गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए गठित आईपीसीसी ने भी चेतावनी दी है कि भारत के समुद्री इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ रहा है. इसके अलावा बढ़ते तापमान के कारण डायरिया और कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं. डेंगू बुख़ार जैसी बीमारियों का भी जलवायु परिवर्तन से सीधा संबंध है.

पर्यावरण और वन विभाग द्वारा कुछ समय पूर्व जारी 'भारत पर जलवायु परिवर्तन का असर' नामक रिपोर्ट के अनुसार भारत के हिमालय, पश्चिमी घाट, तटवर्ती क्षेत्र और पूर्वोत्तर क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि, पानी, स्वास्थ्य और वन क्षेत्रों पर 2030 तक तापमान में वृद्वि होगी. तटवर्ती क्षेत्रों में तापमान में एक से चार डिग्री और अन्य क्षेत्रों में 1.7 से 2.2 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो जाएगा. जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक सूखा पड़ेगा और देश के अन्य क्षेत्रों में ज्यादा बाढ़ आएगी.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in