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तालिबान से बात करेगा अमरीका

तालिबान से बात करेगा अमरीका

वाशिंगटन. 29 अक्टूबर 2011

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि यदि तालिबानी नेता मुल्ला उमर अमरीका की कुछ शर्तों को पूरा कर ले तो अफगानिस्तान में चल रहे शांति प्रयासों के मद्देनजर उनसे बात की जा सकती है. अमरीकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति में हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि तालिबान को यह दिखाना होगा कि वह बातचीत करना चाहता है और निर्धारित शर्तों को पूरा करेगा.

हिलेरी क्लिंटन


हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि हमारे लिये बातचीत की पहली शर्त यही है कि तालिबान विद्रोहियों को हिंसा तथा अलकायदा का साथ छोड़ना होगा. साथ ही महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के अलावा अफगानिस्तान के संविधान का भी पालन करना होगा.

हिलेरी क्लिंटन ने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि तथाकथित अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादियों के बीच फर्क करने की कोशिश अंततः अपने लिए ही घातक है. किसी भी देश के निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और न ही उनकी रक्षा की जानी चाहिए.

इधर एक अन्य कार्यक्रम में हिलेरी ने एक बार फिर से दुहराया है कि पाकिस्तान भारत में 2008 में हमला करने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पाकिस्तान 2008 में मुंबई में हमला करने वालों पर कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक अमरीका अपना दबाव बनाए रखेगा.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि हम जब भी पाकिस्तानियों से मिलते हैं, हम पर उन पर लश्कर-ए-तैयबा को लेकर उनकी असफलताओं पर दबाव डालते हैं. हम उन्हें मुंबई हमले मुकदमे मामले में सभी जरुरतों को पूरा करने के लिए कहते हैं और हम ऐसा भविष्य में भी करते रहेंगे.

गौरतलब है कि इससे पहले भी भारत के साथ अपने रिश्तों की मजबूती की बात करते हुये हिलेरी क्लिंटन ने 21वीं सदी के अहम मुद्दों को हल करने के लिए भारत, चीन और अमरीका के बीच ‘मजबूत और सृजनात्मक’ संबंधों का प्रस्ताव दिया था. अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान को सावधान करते हुए कहा था कि पाकिस्तान आतंकी गुटों का इस्तेमाल कर रहा है और वह ऐसा करके 'एक गंभीर, दुखदाई और रणनीतिक गलती' कर रहा है. हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि आईएसआई के माध्यम से अमरीका ने हक्कानी नेटवर्क से बातचीत की है लेकिन इसमें समझौते जैसी कोई बात नहीं है.


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