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राजीव गांधी के हत्यारों को माफी का कड़ा विरोध

राजीव गांधी के हत्यारों को माफी का कड़ा विरोध

नई दिल्ली. 29 अक्टूबर 2011


पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा माफ किये जाने संबंधी याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया है. केंद्र सरकार ने याचिका के जवाब में दायर हलफनामे में कहा है कि केवल देर होने के कारण किसी की सजा माफ किया जाना तर्कसंगत नहीं है.

राजीव गांधी


ज्ञात रहे कि 21 मई, 1991 को श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को एलटीटीई के आत्मघाती दस्ते ने मार डाला था. इस मामले में मुरूगन, संथन और पेरारिवलन को सुनाई गई फांसी की सजा के खिलाफ हत्यारों ने माफी की अपील की थी. मुरुगन, संथन और पेरारिवलन को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी, जिसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है और इन तीनों को नौ सितंबर को फांसी होनी थी.

इन तीनों की अपील के बाद चेन्नई हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने 30 अगस्त को इन सभी की फांसी की सजा पर आठ हफ्तों के लिए रोक लगा दी थी.

भारत सरकार ने इस अपील के विरोध में दायर हलफनामे में कहा है कि चाहे इसमें कितना भी समय लगा हो, हत्यारों की सज़ा माफ़ किए जाने जैसी कोई परिस्थिति नहीं बनती है या इसे मौत की सज़ा में बदलाव का वैध कारण नहीं समझा जा सकता है. वैसे भी किसी भी परिस्थिति में यह अपराध की जघन्यता को किसी तरह कम नहीं करता.

गौरतलब है तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रमुक नेता एम करुणानिधि ने भी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषी ठहराए गए लोगों की मौत की सज़ा रद्द करने की अपील की है. करुणानिधि का तर्क है कि इन लोगों ने क़रीब 20 वर्ष का समय जेल में काट लिया है, जो आजीवन कारावास से ज़्यादा है. मौत की सज़ा अब रद्द कर देनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो पूरा तमिल समुदाय इस मानवीय कार्य की सराहना करेगा और ख़ुश होगा.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Umakant Mankad [umakantmankad@yahooo.in] Ahmedabad.....Gujarat. - 2011-10-30 10:17:06

 
  न्याय तंत्र और कानून को नजर में रख कर जो देश चलता है वहा ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री की ह्त्या के बारे में अपराधियो को सुविधा प्राप्त है. कानूनन राजीव जी के हत्यारे हो- अफज़ल हो या कसाब इन्हें तो गोली मार कर सजा देनी जरुरी है. जरुरत होने पर संविधान में बदलाव जरुरी है. 
   
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