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दिल्ली | अधिवक्ता आरके आनंद की वकालत पर रोक

वकील आर के आनंद की वकालत पर पाबंदी

नई दिल्ली. 21 अगस्त 2008


दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर के आनंद की वकालत पर 4 महीने तक रोक लगा दी है. कोर्ट ने उन्हें बीएमडब्ल्यू कांड के मुख्य गवाह सुनील कुलकर्णी को प्रभावित करने का दोषी माना है. लोक अभियोजक आई यू खान और श्री आनंद पर 2-2 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है.

बीएमडब्ल्यू कांड के अभियुक्त संजीव नंदा पर आरोप था कि 10 जनवरी, 1999 की रात संजीव नंदा अपने दो मित्रों के साथ बीएमडब्ल्यू कार से एक पार्टी से आ रहा था. आरोप के अनुसार संजीव नशे में था और लोधी रोड पुलिस पिकेट के पास उसकी कार ने सात लोगों को टक्कर मार दी जिससे तीन पुलिसकर्मी सहित छह लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में संजीव नंदा, मानिक कपूर, राजीव गुप्ता, भोलानाथ व श्याम सिंह आरोपी हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता आर के आनंद संजीव नंदा के वकील थे.

कोर्ट ने माना कि आर के आनंद ने इस मामले के गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की है और न्यायिक प्रक्रिया को बाधा पहुंचाई है. कोर्ट ने उन पर दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

कोर्ट ने यह फैसला उस स्टिंग ऑपरेशन की फुटेज देखने के बाद किया, जिसे बीएमडब्ल्यू कांड के मुख्य गवाह सुनील कुलकर्णी ने तैयार किया था. फुटेज में उन्हें और लोक अभियोजक आईयू खान को इस मुकदमे के गवाह सुनील कुलकर्णी को प्रभावित करने की कोशिश करते दिखाया गया था. कोर्ट ने खान पर भी दो हजार रुपए का जुर्माना लगाया है.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोनों अधिवक्ताओं से वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा भी वापस लिए जाने की सिफारिश की है.

 

ज्ञात रहे कि बीएमडब्ल्यू कांड के सभी आरोपी हाई प्रोफाइल लोग हैं. इसी साल केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 1000 करोड रूपये के विवादास्पद बराक मिसाइल सौदे में लाभ लेने के इरादे से साजिश रचने वाले रक्षा सौदा बिचौलिये सुरेश नंदा उसके बेटे संजीव नंदा, चाटर्ड एकाउंटेंट बिपिन शाह और आयकर उप निदेशक (अन्वेषण) आशुतोष वर्मा को गिरफ्तार किया था.


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