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भंवरी देवी मामले में 3 मंत्री निशाने पर

भंवरी देवी मामले में 3 मंत्री निशाने पर

जोधपुर. 6 नवंबर 2011

लोकगायिका और नर्स भंवरी देवी के मामले में सीबीआई का मानना है कि राजस्थान सरकार के तीन मंत्री और इतने ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भंवरी देवी के लापता होने के पीछे हैं. सीबीआई अब मंत्रियों के भंवरी देवी के साथ के रिश्ते की जांच कर रही है. सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि 8 हजार रुपये की तनख्वाह पाने वाली भंवरी देवी के पास करोड़ों की संपत्ति कहां से आई. सीबीआई ने इसी क्रम में अजमेर के एक बैंक लॉकर की भी जांच की है.

भंवरी देवी


भंवरी देवी के अपहरण मामले में सीबीआई द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित करने के बाद भी अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. हालांकि सीबीआई का सारा ध्यान अब भी फलौदी क्षेत्र के पूर्व उप जिला प्रमुख सहीराम विश्नोई पर टिका हुआ है. सीबीआई का मानना है कि सहीराम के पकड़ में आते ही मामला सुलझा लिया जाएगा. सीबीआई ने सहीराम का सुराग देने वाले को भी एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है.

कहा जा रहा है कि भंवरी देवी कथित अश्लील सीडी के जरिए एक कद्दावर नेता को ब्लैकमेल कर रही थी. भंवरी देवी को मनाने और उक्त सीडी को हासिल करने के लिये नेताजी ने भंवरी तक पहुंचाने के लिय सहीराम को 50 लाख रुपये दिये थे. इसके अलावा नेताजी की पत्नी ने इसी काम के लिये सहीराम विश्नोई को 50 लाख रुपये की रकम दी थी. लेकिन भंवरी देवी के अपहरण के बाद से ही सहीराम भी लापता है.

उल्लेखनीय है कि जोधपुर की नर्स और लोक कलाकार भंवरी देवी एक सितंबर से ही लापता हैं. भंवरी देवी ने अपनी कार जल संसाधन विभाग के एक ठेकेदार सोहनलाल विश्नोई को बेची थी. एक सितंबर को वह विश्नोई से कार की रकम लेने के लिए घर से निकली थी, लेकिन उसके बाद वह नहीं लौटी. माना जा रहा है कि राज्य सरकार के कुछ विधायक और मंत्री के साथ भंवरी देवी के कुछ आपत्तिजनक सीडी हैं और इसी कारण से उनका अपहरण किया गया है. लेकिन उनके अपहरणकर्ता अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं.

भंवरी देवी के पति अमरचंद का आरोप था कि उसे सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने गायब कराया था. उसका कहना था कि उसकी 37 वर्षीय पत्नी जालीवाड़ा पीपाड़ में एएनएम के पद पर कार्यरत थी. उसने अपने इच्छित स्थान पर तबादला करवाने के लिए मदेरणा से संपर्क किया. इस पर मदेरणा ने उसका स्थानांतरण तो करवा दिया, लेकिन इसके बाद फोन कर भंवरी को किसी न किसी बहाने बुलाने लगे.

इस मामले में जोधपुर जिले की एक अदालत ने भंवरी देवी के पति के इस्तगासे के आधार पर जलदाय मंत्री महिपाल मदेरणा के खिलाफ भी मामला दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे. बाद में उच्च न्यायालय ने भी सरकार को फटकार लगाई.इसके बाद जब विरोध बढ़ा तो मदेरणा को सरकार ने मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया. गौरतलब है कि 1970 में हुए दिलीप सिंह हत्या कांड में मदेरणा को भी शामिल पाया गया था और वे उस मामले में सजा भुगत चुके हैं.


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