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अलविदा भूपेन दा !

अलविदा भूपेन दा !

गुवाहाटी. 9 नवंबर 2011

संगीतकार और गायक भूपेन हजारिका का शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया. उनके पुत्र तेज हजारिका ने जब उन्हें मुखाग्नि दी तो वहां उपस्थित हजारों लोगों की आंखें भर आईं. उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी. विदाई की घड़ी में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे, जिनमें बड़ी संख्या में राजनेता और संस्कृतिकर्मी शामिल थे.

भूपेन हजारिका


इससे पहले भूपेन हजारिका के पार्थिव देह को जज फिल्ड में पिछले 2 दिनों में 10 लाख से अधिक लोगों ने श्रद्धांजलि दी. लोगों की भीड़ को देखते हुये राज्य सरकार ने मंगलवार के बजाये उनका अंतिम संस्कार बुधवार को करने का निर्णय लिया था.

मंगलवार को न्यूयार्क से गुवाहाटी पहुंचे डाक्टर भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने कहा कि इस देश की संस्कृति से सीखने के लिये पिता ने जो विरासत छोड़ी है, वह अब उनकी जमा पूंजी की तरह है. अपने पिता को याद करते हुये उन्होंने कहा कि पिता जिस तरह वंचितों और पीड़ितों के लिये काम करते रहे हैं, उनके निधन पर उमड़ी भीड़ इसका परिचायक है. भूपेन हजारिका की पत्नी प्रियंवदा तबीयत खराब होने के कारण अमरीका से नहीं पहुंच पाई हैं.

तेज ने कहा-“दो महीने पहले जब पिता जी अस्पताल में थे, तब उनसे मैंने मुलाकात की थी. उन्होंने कहा कुछ नहीं, लेकिन उनके होंठ कांप रहे थे. ऐसा लगा, जैसे वे मुझे अधिक समय नहीं दे पाने के कारण क्षमा चाह रहे हों. मैं उनसे बहुत दूर पला-बढ़ा. वे भारत में थे और मैं अमरीका में. मैं भी उन्हें अधिक समय नहीं दे पाने के कारण शर्मिंदा हूं. मेरे पिता एक संगीतकार, गायक और उससे भी कहीं अधिक एक मानववादी थे.”

अरुणाचल और असम सरकार ने पहले ही राज्य में राजकीय अवकाश की घोषणा कर रखी थी. बुधवार को भी दोपहर तक सरकारी कार्यालयों को बंद रखने के निर्देश जारी किये गये थे. गुवाहाटी की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और मंगलवार की तरह बुधवार को भी अधिकांश निजी और सरकारी प्रतिष्ठान बंद रहे.


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