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अमरीका ने फिर ईरान को धमकाया

अमरीका ने फिर ईरान को धमकाया

तेहरान. 12 नवंबर 2011.

हिलेरी क्लिंटन


अमरीका ने एक बार फिर ईरान पर अपनी आंखें तरेरी है. परमाणु कार्यक्रम के बहाने अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने ईरान को धमकाया है कि वह आईएईए के इस संदेह को दूर करे कि वह परमाणु बम नहीं बना रहा है. पिछले कुछ सालों से अमरीका लगातार ईरान के खिलाफ ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करता रहा है, जिससे दुनिया भर में यह संदेश जाये कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कारण पूरी दुनिया खतरे में है.

एशिया-प्रशांत महासागर इलाके के विदेश मंत्रियों के साथ हवाई की राजधानी होनुलुलु में आयोजित बैठक के बाद अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ की परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए लगातार संदेह जताती रही है कि ईरान परमाणु बम बना रहा है. हिलेरी ने कहा-"अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के इंकार करने और धोखा देने का बहुत पुराना इतिहास है. ऐसे में यह ईरान की जिम्मेवारी बनती है कि वह आईएईए के संदेह को दूर करे."

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि हम ईरान पर दबाव बनाने के लिये मित्र देशों से लगातार संपर्क में हैं.

गौरतलब है कि अमरीका ने पिछले कई सालों से वहां के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद को निशाना बनाने की कोशिश की है और वह कहता रहा है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम की आड़ में बम बनाने का काम कर रहा है. इसके उलट ईरान दावा करता रहा है कि वह परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिये कर रहा है.

पूरी दुनिया में सर्वाधिक परमाणु बम बनाने वाला अमरीका विश्व शांति के आह्वान के साथ ईरान को आदेश देता रहा है कि ईरान परमाणु बम न बनाये वरना उसे कई तरह के प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं. समय-समय पर अमरीका और मित्र देश ईरान को प्रतिबंधित भी करते रहे हैं.

इस साल के शुरु में ही यह खबर आई थी कि ईरान के खिलाफ अमरीका ने कंप्यूटर वायरस के हमले किये थे. माना जा रहा है कि इन हमलों से ईरान की परमाणु हथियार बनाने की प्रक्रिया कई साल पीछे चली गई. न्यूयॉर्क टाइम्स ने के अनुसार अमरीका ने खास तौर पर स्टक्सनैट कंप्यूटर वायरस बनाया था. अमरीका ने ईरान के कंप्यूटरों पर स्टक्सनैट कंप्यूटर वायरस से इस तरीके से हमले किये कि उसके अधिकांश डाटा करप्ट हो गये या उनमें किसी न किसी तरह की खराबी आ गई.

अमरीका को इस हमले में मदद करने वालों में इसराइल भी शामिल था. इसराइल ने ही इस कंप्यूटर वायरस का परीक्षण किया. इसके लिये इसराइल के गुप्त परमाणु संयंत्र डिमोना को चुना गया. परीक्षण के बाद इस वायरस से ईरान में परमाणु कार्यक्रम के लिए उपयोग में लाये जा रहे सैन्ट्रीफ़्यूजों पर हमला किया गया. इस हमले के कारण ये सैन्ट्रीफ़्यूज तेजी से घुमने लगे थे. स्टक्सनैट वायरस का हमला इस तरह का था कि किसी को इसका आभास ही नहीं हुआ. यहां तक कि सैन्ट्रीफ़्यूज के ठीक-ठीक काम नहीं करने पर जब ईरानी अधिकारियों द्वारा रिकार्डिंग देखी गई तो वहां सब कुछ सामान्य पाया गया. यह भी उस वायरस का कमाल था.


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