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माओवादियों का संघर्ष विराम का प्रस्ताव वापस

माओवादियों का संघर्ष विराम का प्रस्ताव वापस

कोलकाता. 15 नवंबर 2011

पश्चिम बंगाल में सरकार और माओवादियों के बीच चल रहे संघर्ष विराम ने अंततः दम तोड़ दिया है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही माओवादियों से निपटने की घोषणा कर चुकी हैं, अब माओवादियों ने सरकारी वार्ताकार को पत्र लिख कर साफ किया है कि अब माओवादियों और सरकार के बीच संघर्ष विराम की मियाद खत्म हो गई है.

माओवादी


भाकपा माओवादी के राज्य सचिव आकाश ने सरकारी वार्ताकार को लिखे एक पत्र में कहा है कि सरकार या आपकी ओर से हमारे पत्रों और मांगों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिलने के कारण समझौते की मियाद खत्म हो गई है. हम शांति चाहते हैं और हमने सरकार और वार्ताकारों से सहयोग करने के लिए अपनी ओर से पुरजोर प्रयास किया.

पत्र में कहा गया है कि माओवादियों ने एकतरफ़ा युद्धविराम घोषित किया और सरकार ने न सिर्फ़ अपना अभियान जारी रखा, बल्कि जंगलमहल से पांच हजार पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को बहाल करने का भी फ़ैसला ले लिया. राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में एक और सलवा जुडूम पैदा करना चाहती है.

गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जंगलमहल में एक सभा को संबोधित करते हुये नक्सलियों को साफ चेतावनी देते हुये कहा था कि, "हमने शांति प्रक्रिया शुरू की है. पिछले चार महीनों से संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हमने सोचा था कि यह कदम कारगर होगा. लेकिन हमें हत्याएं देखने को मिल रही हैं".

ममता बनर्जी अपने भाषण में कहा था कि हम शांति चाहते हैं. हम बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन आपको हथियार त्यागना होगा. मैं आप सबको सात दिनों का समय देती हूं. इस पर विचार कीजिए. यदि आप समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं तो फिर कोई मुद्दा नहीं है. हम चाहते हैं कि बातचीत का दरवाजा खुला रहे. यह अंतिम मौका है. रक्तपात और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते.

इसके बाद ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार से अर्धसैनिक बलों की दो और बटालियन की मांग भी की और माओवादियों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही. पिछले दो सप्ताह में ममता बनर्जी ने अपनी कई सभाओं में माओवादियों को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है.


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