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उत्तर प्रदेश में अब चार नये राज्य

उत्तर प्रदेश में अब चार नये राज्य

लखनऊ. 15 नवंबर 2011

बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 21 नवंबर से शुरु होने वाले विधानसभा के सत्र में उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांट कर अलग-अलग राज्य बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने की घोषणा की है. ये चार नये राज्य होंगे अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम प्रदेश. राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को मंत्रीमंडल ने पहले ही मंजूरी दे दी है.

मायावती


मायावती ने पिछले सप्ताह ही चार नये राज्य बनाये जाने की घोषणा की थी. लेकिन इतनी जल्दी इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने की उनकी घोषणा को विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इस तरह की घोषणा से मायावती उन मतदाताओं को लुभा सकती हैं, जो अलग राज्य की मांग के पक्षधर हैं.

20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में फिलहाल 75 जिले हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में 24 जिलों को शामिल किया जाएगा, जिसमें वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और बस्ती जैसे इलाके हैं. इसी तरह बुंदेलखंड में झांसी, महोबा, बांदा, हमीरपुर, ललितपुर और जालौन समेत 11 जिले हैं. पश्चिम प्रदेश में आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली हैं, जबकि अवध में देवीपाटन, फ़ैज़ाबाद, इलाहाबाद, लखनऊ और कानपुर जैसे राज्य के महत्वपूर्ण इलाके रखे गये हैं.

पत्रकारों से बातचीत में मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है, जिसके कारण राज्य का विकास नहीं हो पाया है. केंद्र और उनसे पहले की राज्य सरकारों ने लगातार इस राज्य को उपेक्षित किया है. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने केंद्र से पैकेज भी मांगा था, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया. ऐसे में बसपा की सरकार अपने राज्य के विकास को और नहीं रोक सकती. सत्ता के विकेंद्रीकरण का लाभ आम जनता को ही मिलेगा.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

विभु आनंद [] कोलकाता - 2011-11-23 07:58:56

 
  उत्तरप्रदेश की आबादी पूरे विश्व में छठें देश के बराबर है.राज्य के पुनर्गठन से विकास एवं प्रशासन बेहतर तरीके से किया जा सकता है. वैसे भी उत्तरप्रदेश का विकास असंतुलित है. बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल पिछडे हुए हैं. इस विभाजन का लाभ इन क्षेत्रों को मिलेगा. जब 30 करोड के अमेरिका में 50 राज्य हो सकते हैं तो 20 करोड के उत्तरप्रदेश में चार राज्य क्यों नहीं हो सकता है. हमें महापंडित राहुल सांकृत्यायन के सुझाव के अनुसार भारत को 49 राज्यों में बांटकर देश के समूचे विकास पर विचार करना चाहिए. 
   
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