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सांप्रदायिकता रोको या इस्तीफा दो- इंसाफ

सांप्रदायिकता रोको या इस्तीफा दो
भुवनेश्वर. 30 अगस्त 2008


इंडियन सोशल एक्शन फोरम (इंसाफ) ने आरोप लगाया है कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की अमानवीय एवं रहस्यमय हत्या की आड़ लेकर संघ परिवार 23 अगस्त की शाम से पूरे उड़ीसा, खासतौर पर कंधमाल और आस-पास के क्षेत्रों में, आतंक का नंगा खेल खेल रहा है.

एक पत्रकार वार्ता में इंसाफ के पदाधिकारियों ने उड़ीसा में जारी घटनाक्रम पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि तमाम सीमाओं को लांघ कर अल्पसंख्यक वर्ग के मासूम एवं निर्दोष आदिवासियों, दलितों, महिलाओं, बच्चों एवं विकलांगों पर हुए हमले एवं अत्याचार तथा घरों, दुकानों एवं गिरिजाघरों को जलाना सुनियोजित था, जिसे संघ परिवार (आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भाजपा) ने भडकाया एवं नेतृत्व दिया.

इंसाफ के सदस्यों ने भाजपा व बीजू जनता दल शासित उड़ीसा सरकार पर राज्य के नागरिकों की जान-माल व आत्मसम्मान की रक्षा करने में विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक 20 से अधिक निर्दोष लोग इस हिंसा में मारे जा चुके हैं. हजारों लोग घर छोड़कर भागना पड़ा है, जिनमें गर्भवती महिलायें, बच्चे और बूढ़े शामिल हैं. ये लोग भोजन, पानी एवं कपड़े के अभाव झेलते हुए जंगलों में बदहाली में फंसे हुए हैं.

प्रेस कांफ्रेस में प्रभावितों को पर्याप्त सहायता तत्काल पहुंचाने के अलावा सरकार से सांप्रदायिक हिंसा को रोकने या फिर इस्तीफा देने की मांग की गई.

गौरतलब है कि स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती को गृह मंत्रालय ने विशेष सुरक्षा भी मुहैय्या करायी थी. स्वामी सरस्वती ने अपने ऊपर हुए हमले के 48 घंटे पहले एक एफ.आई.आर. भी दर्ज कराया था और किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा जान से मारने की धमकी देने का जिक्र करते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग भी की थी. लेकिन प्रशासन ने स्वामी और अन्य लोगों की जान बचाने के लिए कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया.

इंसाफ के सदस्यों ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्वामी की शव-यात्रा को भी प्रशासन ने सम्प्रदायिक तौर पर संवेदनशील इलाकों जैसे कुदुमीबांध, बालीगुडा, नवगांव और अन्य स्थानों से गुजरने दिया. बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के इस शव-यात्रा के साथ चल रही हथियारों से लैस एवं उत्तेजित भीड़ का नेतृत्व प्रवीण तोगड़िया और उड़ीसा सरकार के तीन मंत्री कर रहे थे. गौरतलब है कि 2002 के गुंजरात दंगे में प्रवीण तोगड़िया की भूमिका को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने सुरक्षात्मक नजरिये से अपने-अपने राज्यों में उनके प्रवेश की अनुमति नहीं दी है.

प्रेस कांफ्रेंस में जाने-माने समाजकर्मी अनिल चौधरी, इंसाफ के महासचिव विल्फ्रेड डि'कोस्टा, इंसाफ (उड़ीसा) के प्रशांत पाइकरे सहित केदार राय, संग्राम मल्लिक, नरेन्द्र मोहंती, सुदर्शन छोटराय और धीरेन्द्र पांडा ने 6 सूत्री मांग रखी है, जिनमें प्रवीण तोगड़िया द्वारा घोषित राज्य भर में तथाकथित अस्थि कलश यात्रा पर रोक लगाने की मांग भी है ताकि अन्य इलाकों में साम्प्रदायिक तांडव के संभावित विस्तार को रोका जा सके.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

dinesh dhyani(dineshdhyani@yahoo.com)

 
 Hello!
I am not agree with INSAf statement about kandmal incident. it is observed that being a hindu is very harmful in this country. Nobody is asking that why Swami Laxmanand Sarswati has been killed? arrest them who are responsible for murder.
But all people are keeping their hands benind RSS and Vishwa Hindu Parishad, Bajrandal..., what about Christans orgnisations who are changing religion in interior areas of india?
When a hindu killed nobody ask about murders but when other dies then all humnan rights org. and so call cecular people and org. come on road why? are not hindu people in this country?
nobody has right to kill anybody and nobody has right to damage govt. and public property but go on the resiona with honesty.
 
   

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