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माओवादी हैं आतंकियों से ज्यादा खतरनाक- ममता बनर्जी

माओवादी हैं आतंकियों से ज्यादा खतरनाक- ममता बनर्जी

कोलकाता. 17 नवंबर 2011

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि माओवादी आज की तारीख में आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं और राज्य की सरकार चुपचाप रक्तपात नहीं देखती रहेगी. उन्होंने जल्दी ही माओवादियों के खिलाफ किसी बड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुये कहा कि हम हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठ सकते.

ममता बनर्जी


राज्य के पुरुलिया के बलरामपुर इलाके में दो तृणमूल कार्यकर्ताओं की 14 नवंबर को माओवादियों द्वारा की गई हत्या के बाद आयोजित शोक सभा में ममता बनर्जी ने माओवादियों के साथ-साथ उनके समर्थकों पर भी निशाना साधा. शोक सभा में ममता बनर्जी ने कहा कि उत्तरपाड़ा और जादवपुर विश्वविद्यालय में जो कुछ चल रहा है, उससे मैं वाकिफ हूं.

ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे अभी भी इस बात की उम्मीद है कि माओवादी मुख्यधारा में वापस लौटेंगे. अगर ऐसा होता है तो हम समाज की मुख्यधारा में लौटने वालों का हम स्वागत करेंगे और हमारी सरकार उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था करेगी. लेकिन अगर माओवादी सोचते हैं कि वे हिंसा के सहारे हमें दबा सकते हैं तो सरकार भी हाथ पर हाथ धर कर बैठी नहीं रहेगी.

गौरतलब है कि भाकपा माओवादी के राज्य सचिव आकाश ने हाल ही में सरकार से चार माह के संघर्ष विराम की नई घोषणा को लेकर पत्र लिखा था. जबकि हाल ही में पिछले संघर्ष विराम की कोशिशों को खत्म करने की भी बात कही गई थी. सरकारी वार्ताकार को लिखे एक पत्र में कहा गया था कि सरकार या आपकी ओर से हमारे पत्रों और मांगों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिलने के कारण समझौते की मियाद खत्म हो गई है. हम शांति चाहते हैं और हमने सरकार और वार्ताकारों से सहयोग करने के लिए अपनी ओर से पुरजोर प्रयास किया.

पत्र में कहा गया था कि माओवादियों ने एकतरफ़ा युद्धविराम घोषित किया और सरकार ने न सिर्फ़ अपना अभियान जारी रखा, बल्कि जंगलमहल से पांच हजार पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को बहाल करने का भी फ़ैसला ले लिया. राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में एक और सलवा जुडूम पैदा करना चाहती है.

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जंगलमहल में एक सभा को संबोधित करते हुये नक्सलियों को साफ चेतावनी देते हुये कहा था कि, "हमने शांति प्रक्रिया शुरू की है. पिछले चार महीनों से संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हमने सोचा था कि यह कदम कारगर होगा. लेकिन हमें हत्याएं देखने को मिल रही हैं".

ममता बनर्जी अपने भाषण में कहा था कि हम शांति चाहते हैं. हम बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन आपको हथियार त्यागना होगा. मैं आप सबको सात दिनों का समय देती हूं. इस पर विचार कीजिए. यदि आप समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं तो फिर कोई मुद्दा नहीं है. हम चाहते हैं कि बातचीत का दरवाजा खुला रहे. यह अंतिम मौका है. रक्तपात और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते.

इसके बाद ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार से अर्धसैनिक बलों की दो और बटालियन की मांग भी की और माओवादियों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही. पिछले दो सप्ताह में ममता बनर्जी ने अपनी कई सभाओं में माओवादियों को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है.


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