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और मोटी होगी क्रीमीलेयर

और मोटी होगी क्रीमीलेयर

नई दिल्ली. 17 नवंबर 2011

क्रीमीलेयर


अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिनों में ओबीसी वर्ग के लिये बनाई गई क्रीमीलेयर की सीमा को साढ़े चार लाख से बढ़ा कर नौ लाख रुपये किया जा सकता है. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने गुरुवार को केंद्र सरकार से यह सिफारिश की है, जिसके बाद ओबीसी के लिए क्रीमीलेयर की सामान्य सीमा नौ लाख रुपये वार्षिक और मेट्रो शहरों के लिये इससे भई अधिक हो जाएगी.

गौरतलब है कि देश में मंडल आयोग की सिफारिशों को लेकर उपजे विवाद के निपटारे के लिये रामनंदन प्रसाद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसने पहली बार क्रीमीलेयर की बात कहते हुये ऐसे वर्गों को आरक्षण से वंचित करने की बात कही थी, जो आर्थिक रुप से संपन्न है. इससे पहले इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ वाद 1992 में भी उच्चतम न्यायालय ने ऐसी ही सिफारिश की थी. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने एक खास आय वर्ग को आरक्षण का लाभ देने से रोकने के लिये क्रीमीलेयर सीमा निर्धारित की.

हर तीन सालों में क्रीमीलेयर की समीक्षा के बाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने माना कि फिलहाल वार्षिक साढ़े चार लाख रुपये की सीमा ऐसी नहीं है, जिसके बाद आरक्षण का लाभ ओबीसी के बड़े तबके को मिल सके.

इधर केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नयी जातियों को जोड़ने के उद्देश्य से ओबीसी की सूची में संशोधन संबंधी एक राष्ट्रीय पैनल की सिफारिशों को बुधवार को मंजूरी दे दी. इससे लगभग 20 राज्यों में चार दर्जन से अधिक जातियों को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ हासिल हो सकेगा. हालांकि पिछड़े वर्ग संबंधी राष्ट्रीय आयोग ने ऐसी 70 से भी अधिक जातियों को आरक्षण के लाभ की अनुशंसा की थी.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Subhash [purohitsc@yahoo.com] Purohit - 2011-11-18 07:20:48

 
  मुझे समझ मैं नहीं आता कि
१. जाति के आधार पर आरक्षण देने से क्या जातिवाद नहीं बढ़ेगा.
२. क्या आरक्षण देने से पिछिले ६४ सालो मे कोई तरक्की देखी गई.
३. क्या इस तरह से देश मे खुशहाली आएगी.
४. क्या आरक्षण से पास डॉक्टर से आप आपना इलाज करने मे खतरा महसूस नहीं करंगे.
५. क्या इससे सामान्य जाति के विद्यार्थियों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा.
६. क्या ये मात्र वोट बैंक की राजनीति तो नहीं है .
ऐसे ही कई प्रश्न आपने दिमाग मे भी आते होंगे. देश मे हर स्तर पर गरीबो के नाम पर होने वाले शिक्षा, भोजन, आवास, चिकित्षा का कुल खर्च से ही देश खुशहाल हो सकता है. वशर्ते वो गरीबो तक वास्तव मे पहुंचे.
जरूरत आरक्षण की नहीं, भर्ष्टाचार को मिटाने की है.
 
   
 

Nishant [] Kanpur - 2011-11-18 05:28:45

 
  This vote bank scheme will kill our country soon, Thanks to all politicians............!!!  
   
 

ranjan [] delhi - 2011-11-18 04:43:56

 
  आरक्षण को बढ़ाकर ५४ फीसदी करनी चाहिए क्योकि आबादी के अनुसार अभी पूर्ण न्याय नहीं मिला है. 
   
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