पहला पन्ना >मुद्दा >झारखंड Print | Share This  

वाल्सा जॉन की हत्या में माओवादियों का हाथ ?

वाल्सा जॉन की हत्या में माओवादियों का हाथ ?

रांची. 21 नवंबर 2011

वाल्सा जॉन


ईसाई धर्म प्रचारक सिस्टर वाल्सा जॉन की पाकुड़ जिले में हुई हत्या के मामले में झारखंड पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे माओवादियों का हाथ हो सकता है. कहा जा रहा है कि माओवादी एक कोल कंपनी के साथ सिस्टर वाल्सा के समझौते को लेकर नाराज थे. इसके अलावा बलात्कार के एक मामले में भी सिस्टर वाल्सा की भूमिका को लेकर माओवादियों से जुड़े स्थानीय दस्ते को आपत्ति थी.

हालांकि आमतौर पर इस तरह के किसी भी मामले में अपनी जिम्मेवारी लेने वाले माओवादी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुये हैं और उनकी ओर से कोई भी बयान नहीं आया है. स्थानीय पुलिस की मानें तो इस मामले में माओवादियों के बीच ही आपसी असहमति की बात आ रही है.

ज्ञात रहे कि मंगलवार की रात झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा थानांतर्गत पचुबाड़ा गांव में लगभग 40-50 धारदार हथियारों और तीर-धनुष से लैश लोगों ने सिस्टर वाल्सा जॉन की हत्या कर दी थी. केरल के एर्नाकुलम जिले की हड्डापल्ली स्थित सिलूकट्टा गांव की मूल निवासी वाल्सा जॉन झारखंड के दुमका जिले में एक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं. बाद में उन्होंने धर्म प्रचार का काम शुरु कर दिया. इस दौरान पैनम कंपनी ने जब इलाके में कोल खनन का काम शुरु किया तो वाल्सा जॉन ने कंपनी के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया. राजमहल पहाड़ बचाओ आंदोलन ने उन्हें एक नई पहचान दी.

कहा जाता है कि बाद में हालत ये हो गई थी कि इलाके में वाल्सा जॉन की इच्छा के बिना एक पत्ता भी खड़कना मुश्किल हो गया था. गांव वालों के सहयोग से वाल्सा जॉन ने अपने तरीके से इलाके में विकास के काम शुरु किये और पैनम का विरोध जारी रहा. हालांकि दुमका के तत्कालीन सांसद प्रो. स्टीफन मरांडी की करीबी रही वाल्सा जॉन ने बाद में मरांडी के कहने पर रातों-रात कंपनी को कोयला खनन का काम शुरु करने पर सहमति भी दे दी. कंपनी ने 5 जुलाई 2005 से इलाके में खनन का काम शुरु कर दिया. इस घटना के बाद स्थिति ये हो गई कि वाल्सा जॉन की हर मदद के लिये पैनम कंपनी आगे आती रही और दोनों के संबंध बहुत मजबूत हो गये.

ताज़ा मामले में 18 गांवों को लेकर नार्थ ब्लॉक कोल परियोजना का काम शुरु होने वाला था और वाल्सा जॉन को लेकर गांव वाले नाराज थे. पैनम कंपनी की खासमखास बनी वाल्सा जॉन से दूसरी खनन कंपनियों की भी नाराजगी चल ही रही थी. इस दौरान अपने डेढ़ महीने लंबे केरल प्रवास से जब वाल्सा जॉन 7 नवंबर को पाकुड़ लौटीं तो इलाके के लोगों ने उनका खूब विरोध किया था.

मंगलवार को उनकी हत्या के बाद स्थानीय विधायक साइमन मरांडी का कहना था कि वाल्सा जॉन की हत्या उनकी अपनी करनी का परिणाम है. दूसरी ओर संताल परगना प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक विनय कुमार पांडेय का कहना था कि पैनम कोल माइंस का पहले विरोध और फिर सहमति दिये जाने के कारण इलाके के लोगों में गहरी नाराजगी थी. फिर से नार्थ कोल ब्लॉक को लेकर भी इलाके के लोग वाल्सा जॉन का विरोध कर रहे थे. ऐसे में इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे ही लोगों का नाराजगी के कारण यह दुखद घटना घटी हो.

इलाके के लोगों का मानना था कि वाल्सा की हत्या कोल माफिया के आपसी संघर्ष का परिणाम है. पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक साइमन मरांडी के उस बयान ने इस बात पर मुहर लगा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो जैसा करेगा, वह वैसा भरेगा. उन्होंने कहा था कि सिस्टर वाल्सा गुटबाजी और अपनी करनी का शिकार हो गईं.