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दूसरे ग्रहों में जीवन की संभावना पर नई खोज

दूसरे ग्रहों में जीवन की संभावना पर नई खोज

नई दिल्ली. 24 नवंबर 2011

क्या दूसरे ग्रहों में भी जीवन है? क्या वहाँ भी उसी तरह से लोग रहते हैं जिस तरह से पृथ्वी में रहते हैं? क्या वहाँ भी पृथ्वी की तरह की जीवन परिस्थितियाँ हैं? वैज्ञानिकों ने एक सूची तैयार की है कि किन ग्रहों और किन चंद्रमाओं पर जीवन होने की संभावना है.

एलियन


एक शोधपत्र के हवाले से बीबीसी का कहना है कि अब दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने एक ठोस काम किया है. उन्होंने एक सूची तैयार की है कि किन ग्रहों और किन चंद्रमाओं पर जीवन होने की संभावना है. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि हमारे सौरमंडल के शनि ग्रह का चंद्रमा टाइटन और हमारे सौर मंडल से बाहर का एक ग्रह 'ग्लीज़ 581जी' में जीवन की सबसे अधिक संभावना हो सकती है. ये दोनों पृथ्वी से 20.5 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं. एक प्रकाश वर्ष यानी वह दूरी जो प्रकाश की गति से एक वर्ष में तय की जा सकती है. एक प्रकाश वर्ष में लगभग 10 खरब किलोमीटर होते हैं.

बीबीसी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दूसरे ग्रहों में जीवन की संभावना के लिए दो तरह की सूची तैयार की है.एक सूची उन ग्रहों या चंद्रमाओं की है जो पृथ्वी जैसे हैं इसे 'अर्थ सिमिलरिटी इंडेक्स यानी ईएसआई का नाम दिया गया. दूसरी सूची उनकी जहाँ जीवन पनपने की संभावना दिखती है, इसे 'प्लैनेटरी हैबिटैबिलिटी इंडेक्स यानी पीएचआई का नाम दिया गया.

वैज्ञानिकों का ये शोध खगोल जीवविज्ञान की एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इस शोधपत्र के सहलेखक, अमरीका की वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉ डिर्क शुल्ज़ माकश कहते हैं, "चूंकि हम अपने अनुभवों से जानते हैं कि पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हों तो वहाँ जीवन पनप सकता है इसलिए पहला सवाल ये था कि क्या किसी और दुनिया में पृथ्वी जैसी परिस्थितियाँ हैं?"

वे कहते हैं, "दूसरा सवाल ये था कि किसी और सौरमंडल में क्या कोई ऐसा ग्रह है जहाँ ऐसा मौसम है कि वहाँ किसी और रूप में जीवन पनप सकता है, चाहे उसकी जानकारी हमें हो या न हो."

जैसा कि सूचियों के नाम से स्पष्ट है, पहली श्रेणी ईएसआई में उन ग्रहों को रखा गया जो पृथ्वी की तरह हैं. इसमें उनके आकार, घनत्व और अपने मातृ ग्रह से दूरी को ध्यान में रखा गया.

जबकि दूसरी सूची यानी पीएचआई में दूसरे पैमाने रखे गए, जैसे कि उस दुनिया का मौसम कैसा है, उसकी सतह चट्टानी है या बर्फ़ीली, वहाँ वायुमंडल है या चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है या नहीं आदि. वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इसका भी अध्ययन किया कि किसी ग्रह में जीवों के लिए किसी तरह की ऊर्जा उपलब्ध है.

ये ऊर्जा मातृ ग्रह से रोशनी की तरह भी मिल सकती है या फिर गुरुत्वाकर्षण जैसी कोई शक्ति हो जिसकी वजह से ग्रह या चंद्रमा पर चीज़ों के परस्पर रगड़ से ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना हो. जब इन परिस्थियों पर विचार हुआ तो रसायन शास्त्र को वरीयता दी गई, मसलन क्या उस ग्रह या चंद्रमा में कोई कार्बनिक यौगिक पदार्थ मौजूद है या कोई ऐसा तरल पदार्थ मौजूद है जो व्यापक रासायनिक क्रिया करने में सक्षम हो?

ईएसआई यानी पृथ्वी से समानता वाली सूची में सबसे अधिक अंक 1.00 दिया गया, जो कि ज़ाहिर तौर पर पृथ्वी के लिए था लेकिन दूसरे नंबर पर ग्लीज़ 581जी आया जिसे 0.89 अंक मिले. ये ग्रह हमारे सौरमंडल से बाहर है और कई वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व पर ही संदेह है. इसके बाद इससे मिलता जुलता ही एक ग्रह ग्लीज़ 581डी आया जिसे 0.74 अंक मिले.

हमारे अपने सौर मंडल में जिन ग्रहों को सबसे ज़्यादा अंक मिले उनमें मंगल (0.70 अंक) और बुध (0.60 अंक) हैं.

जबकि उन ग्रहों या चंद्रमाओं में जो पृथ्वी की तरह तो नहीं हैं लेकिन फिर भी वहाँ जीवन हो सकता है, सबसे अधिक 0.64 अंक मिले शनि के चंद्रमा टाइटन को, दूसरे मंगल (0.59 अंक) को और तीसरे वृहस्तपति (0.47 अंक) को.

बीबीसी के अनुसार वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसे ग्रहों की तलाश में तेज़ी आई है जहाँ जीवन होने की संभावना हो सकती है. नासा ने वर्ष 2009 में केप्लर स्पेस टेलिस्कोप अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था. इस टेलिस्कोप ने अब तक एक हज़ार ऐसे ग्रहों या चंद्रमाओं का पता लगाया है जहाँ जीवन पनपने की संभावना हो सकती है.

उनका कहना है कि भविष्य में जो टेलिस्कोप बनेंगे, उनमें ये क्षमता भी होगी कि वह किसी ग्रह में जैविक पदार्थों से निकलने वाली रौशनी को पहचान सके. उदाहरण के तौर पर क्लोरोफ़िल की उपस्थिति जो किसी भी पेड़-पौधे में मौजूद अहम तत्व होता है.


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