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माओवादी नेता कोटेश्वर राव ऊर्फ किशन मुठभेड़ में ढ़ेर

माओवादी नेता कोटेश्वर राव ऊर्फ किशन मुठभेड़ में ढ़ेर

कोलकाता. 24 नवंबर 2011

किशनजी कोटेश्वर राव


भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी के नेता मल्लोजुला कोटेश्वर राव ऊर्फ किशन के एक पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की खबर है. केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह के अनुसार पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिलांतर्गत बुरीशोल के जंगलों में स्थित कुशबोनी गाँव में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ हुई. अलग-अलग राज्यों में प्रह्लाद, मुरली, रामजी, जयंत, श्रीधर के नाम से मशहूर माओवादी नेता मल्लोजुला कोटेश्वर राव को मीडिया में किशनजी के नाम से जाना जाता है.

जुलाई 1956 में आंध्रप्रदेश के करीमनगर में एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के घर पैदा हुये कोटेश्वर राव सबसे पहले बंगाल में चले लालगढ़ के आंदोलनों के कारण मीडिया में सामने आये. लेकिन नक्सल आंदोलनों में उनकी सक्रियता पिछले 35 सालों से थी. मीडिया में सबसे अधिक बयान देने वाले कोटेश्वर राव ने आपातकाल के आसपास नक्सल आंदोलन की राह पकड़ी थी और बाद में पीपुल्स वार ग्रूप की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई. पीपुल्स वार ग्रूप, पार्टी युनिटी और एमसीसी के विलय में कोटेश्वर राव को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रुप में देखा जाता रहा है. उनकी पत्नी सुजाता भी उनके साथ ही नक्सल आंदोलन में सक्रिय थी.

कोटेश्वर राव की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना ऐसे दोर में हुई है, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और माओवादियों के बीच शांति वार्त्ता व झड़प की लगातार खबरें सामने आ रही थीं. ममता बनर्जी ने सप्ताह भर पहले ही कहा था कि माओवादी आज की तारीख में आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं और राज्य की सरकार चुपचाप रक्तपात नहीं देखती रहेगी. उन्होंने जल्दी ही माओवादियों के खिलाफ किसी बड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुये कहा था कि हम हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठ सकते.

गौरतलब है कि भाकपा माओवादी के राज्य सचिव आकाश ने हाल ही में सरकार से चार माह के संघर्ष विराम की नई घोषणा को लेकर पत्र लिखा था. जबकि हाल ही में पिछले संघर्ष विराम की कोशिशों को खत्म करने की भी बात कही गई थी. सरकारी वार्ताकार को लिखे एक पत्र में कहा गया था कि सरकार या आपकी ओर से हमारे पत्रों और मांगों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिलने के कारण समझौते की मियाद खत्म हो गई है. हम शांति चाहते हैं और हमने सरकार और वार्ताकारों से सहयोग करने के लिए अपनी ओर से पुरजोर प्रयास किया.

पत्र में कहा गया था कि माओवादियों ने एकतरफ़ा युद्धविराम घोषित किया और सरकार ने न सिर्फ़ अपना अभियान जारी रखा, बल्कि जंगलमहल से पांच हजार पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को बहाल करने का भी फ़ैसला ले लिया. राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में एक और सलवा जुडूम पैदा करना चाहती है.

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जंगलमहल में एक सभा को संबोधित करते हुये नक्सलियों को साफ चेतावनी देते हुये कहा था कि, "हमने शांति प्रक्रिया शुरू की है. पिछले चार महीनों से संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हमने सोचा था कि यह कदम कारगर होगा. लेकिन हमें हत्याएं देखने को मिल रही हैं".

ममता बनर्जी अपने भाषण में कहा था कि हम शांति चाहते हैं. हम बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन आपको हथियार त्यागना होगा. मैं आप सबको सात दिनों का समय देती हूं. इस पर विचार कीजिए. यदि आप समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं तो फिर कोई मुद्दा नहीं है. हम चाहते हैं कि बातचीत का दरवाजा खुला रहे. यह अंतिम मौका है. रक्तपात और बातचीत एकसाथ नहीं चल सकते.


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