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4-5 दिसंबर को माओवादियों का भारत बंद

4-5 दिसंबर को माओवादियों का भारत बंद

कोलकाता. 28 नवंबर 2011


माओवादी नेता मल्लोजुला कोटेश्वर राव यानी किशनजी की मौत के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी ने चार-पांच दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है. साथ ही माओवादी मंगलवार से एक सप्ताह तक विरोध सप्ताह भी मनाएंगे.

सीपीआई माओवादी के प्रवक्ता मुल्लाजोला वेणुगोपाल ऊर्फ अभय ने समूचे देशवासियों से अपील की है कि कोटेश्वर राव की हत्या के विरोध में 29 नवम्बर से पाँच दिसंबर तक विरोध सप्ताह और भारत बंद को सफल बनाए. विरोध सप्ताह के दौरान सभा, जुलूस, धरना, काली पट्टी लगाना और चक्का जाम करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे.

बंगाल की मुख्मंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुये अभय ने कहा कि कामरेड आज़ाद की हत्या पर घड़ियाली आंसू बहाने वाली ममता बनर्जी ने सत्ता में आने के बाद एक तरफ माओवादियों के साथ वार्ता का ढोंग रचाया और दूसरी तरफ एक अग्रणी नेता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी की हत्या कर अपने जनविरोधी व फासीवादी चेहरे पर से नकाब उठा दिया.

माओवादी प्रवक्ता अभय ने कहा कि लुटेरे शासकवर्ग के लोग और उनका मार्गदर्शन करने वाले साम्राज्यवादी जो यह सपना देख रहे हैं कि वह क्रांतिकारी आंदोलन के उच्च नेतृत्व की हत्या कर माओवादी पार्टी का जड़ से सफाया कर देंगे, उन्हें शोषित जनता जन युद्ध के ज़रिए ज़रूर दफना देगी.

इधर माओवादियों के सवालों पर हमला बोलते हुये बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि माओवादी नेता कोटेश्वर राव ऊर्फ किशन को आत्म समर्पण के लिये तीन दिन का समय दिया गया था लेकिन माओवादियों ने आत्मसमर्पण के बजाय हमारे जवानों पर हमला बोलना जारी रखा.

कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि किशन जी के नेतृत्व में माओवादियों ने लगभग 1000 राउंड गोलियां चलाईं, ऐसे में हमारे जवानों के पास सैकड़ों निर्दोष ग्रामीणों को बचाने के लिये जवाबी कार्रवाई करने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं था. ममता बनर्जी ने सवाल किया कि माओवादी हम पर हमला करें और उम्मीद करें कि सरकार चुप रहेगी, ऐसा संभव नहीं है.

ममता बनर्जी ने कहा कि माओवादियों ने पहले भी 1984, 1987, 1990, 1995 में मेरा सर कलम करने की बात की थी, लेकिन मैं ऐसी धमकियों से डरने वाली नहीं हूं. मैं बहादुरी के साथ जिंदा रहना चाहती हूं. कोटेश्वर राव की मौत के मामले में मानवाधिकार संगठनों को आड़े हाथों लेते हुये ममता बनर्जी ने कहा कि हमें मानवाधिकार सीखाने की जरुरत नहीं है. हम मानवाधिकार बेहतर जानते हैं. जब माओवादी निर्दोष लोगों को मारते हैं, तब ये मानवाधिकार के समर्थक कहां रहते हैं.


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