पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

एफडीआई का हल निकल आएगा- कांग्रेस

एफडीआई का हल निकल आएगा- कांग्रेस

नई दिल्ली. 29 नवंबर 2011

एफडीआई


खुदरा एफडीआई के मुद्दे आयोजित सर्वदलीय बैठक भले बेनतीजा रही हो लेकिन कांग्रेस पार्टी के सांसद राजीव शुक्ला ने दावा किया है कि जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकल जाएगा. ये और बात है कि मंगलवार को भी इस मुद्दे पर एक बार फिर संसद की कार्रवाई ठप्प हो गई है.

इससे पहले मंगलवार की सुबह प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा ही रही. संसद भवन के एनेक्सी में बुलाई गई इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी वामदलों, आल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेताओं ने हिस्सा लिया.

इस बैठक में विपक्षी दलों के साथ ही सरकार में शामिल दल भी खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति वापस लेने की मांग पर अड़े रहे. परिणामस्वरूप बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई. विपक्ष ने साफ कर दिया कि सरकार को फैसला वापस लेना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो संसद नहीं चलने देंगे. विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह प्रधानमंत्री से बात करेंगे. सरकार की सहयोगी पार्टी तृणमूल ने भी अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि सरकार को फैसला वापस लेना ही होगा.

गौरतलब है कि सरकार ने खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की अनुमति दी है, जिसके बाद से ही संसद की कार्रवाई नहीं चल पा रही है. सरकार में शामिल तृणमूल और द्रमुक भी सरकार के खिलाफ हैं.

लेकिन सरकार इस मुद्दे पर झुकने के लिये तैयार नहीं है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा का कहना है कि अपने निर्णय से सरकार पीछे नहीं हटने वाली है. हाल ही में शर्मा ने एक चिट्ठी लिख कर इसके फायदे गिनाये हैं और कहा है कि सरकार ने इस निवेश में यह शर्त भी रखी गई है कि मल्टी नैशनल कंपनियों को 30 प्रतिशत समान छोटे उद्योगों से खरीदना होगा. इससे स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा. ग्रामीणों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेगी, जिसका फायदा ग्रामीण युवाओं को मिलेगा. वे भी कृषि कारोबार में एक बड़े हिस्सेदार बन सकेंगे.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in