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लोकपाल पर सरकारी मसौदा निराश करने वाला-किरण बेदी

लोकपाल पर सरकारी मसौदा निराश करने वाला-किरण बेदी

नई दिल्ली. 29 नवंबर 2011

किरण बेदी


संसदीय समिति द्वारा पेश लोकपाल बिल के पहले ड्राफ्ट की आलोचना करते हुये टीम अन्ना ने कहा है कि जिस तरह से पहला मसौदा सामने आया है, उसमें सीबीआई को नहीं रखा गया है. सीबीआई के बिना यह टीन के खाली डब्बे से अधिक नहीं है. टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने कहा है कि यह मसौदा निराश करने वाला है. लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए किरण बेदी ने कहा कि सरकार के पास संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं है. ऐसे में सरकार इस विधेयक को पास नहीं करने के लिये इस्तेमाल करेगी.

गौरतलब है कि संसदीय समिति ने 170 पन्नों का लोकपाल का पहला मसौदा समिति के 30 सदस्यों को भेजा है. खबर है कि लोकपाल को चुनाव आयोग की तरह बनाये जाने की बात की गई है, जिसको लेकर राहुल गांधी ने पहले ही संसद में अपना बयान दिया था. स्थायी समिति ने न्यायपालिका और सांसदों के संसद में किये गये बर्ताव को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया है और सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा को लोकपाल के अंतर्गत लाये जाने की मांग को खारिज कर दिया है.

मसौदे में निचले स्तर की नौकरशाही को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने पर किरण बेदी ने कहा कि यह अपने वादे से पीछे हटना है और हम एक बार फिर से एक व्यापक आंदोलन का आह्वान करेंगे.

टीम अन्ना के एक अन्य सदस्य अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि वह बड़े एनजीओ को लोकपाल के पक्ष में हैं लेकिन सरकारी सहायता प्राप्त एनजीओ को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सीबीआई को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिये. उन्होंने तीसरे और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी लोकपाल के दायरे में लाने की बात की है.

किरण बेदी ने सीबीआई को लोकपाल से बाहर रखने पर आश्चर्य जताते हुये कहा कि यदि सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा लोकपाल के दायरे में नहीं आई तो देश में कभी भी उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ मामलों का तेजी से और सफलतापूर्वक निपटारा नहीं हो सकेगा.

न्यायपालिका को बाहर रखने को किरण बेदी ने लोगों की मांग को तगड़ा झटका करार दिया क्योंकि उनके मुताबिक लोगों की बहुत इच्छा थी कि न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाया जाये. उन्होंने कहा कि इस तरह न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मामले अब किसी भी दायरे में नहीं आयेंगे, न ही न्यायिक जवाबदेही विधेयक और ना ही लोकपाल में.


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