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किशनजी की मुठभेड़ असली-चिदंबरम

किशनजी की मुठभेड़ असली-चिदंबरम

नई दिल्ली. 30 नवंबर 2011

चिदंबरम


केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी के नेता मल्लोजुला कोटेश्वर राव ऊर्फ किशन की मौत फर्जी मुठभेड़ में नहीं हुई थी. उन्होंने दावा किया कि नक्सली नेता कोटेश्वर राव ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके जवाब में हुई फायरिंग में कोटेश्वर राव की मौत हो गयी.

गौरतलब है कि 24 नवंबर को पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिलांतर्गत बुरीशोल के जंगलों में स्थित कुशबोनी गाँव में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में कोटेश्वर राव के मारे जाने का दावा पुलिस ने किया था. जिसे लेकर माओवादियों और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया था कि कोटेश्वर राव को पुलिस हिरासत में मारा गया.

गुरुवार को इसी मुद्दे पर बात करते हुये गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि हमें इसमें कोई संदेह नहीं कि माओवादी नेता किशनजी की मौत मुठभेड़ में हुई. उन्होंने कहा कि हम हिंसा के आगे नहीं झुकेंगे. माओवादियों और पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को वार्ता से पहले हिंसा रोकनी होगी.

कोटेश्वर राव की मौत को लेकर बंगाल के माओवादी प्रदेश समिति के सचिव और प्रवक्ता आकाश ने दावा किया था कि किशनजी को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया. इसके विरोध में माओवादी 26 नवंबर से दो दिन का राज्यव्यापी बंद और सप्ताह भर तक विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं. इसके अलावा माओवादी समर्थक मशहूर तेलुगु कवि वरवरा राव ने भी आरोप लगाया था कि कोटेश्वर राव को बुधवार को ही सुरक्षाबल ने पकड़ा था और बाद में पुलिस यातना के बाद गुरुवार को उनकी हत्या करके फर्जी मुठभेड़ की कहानी गढ़ दी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद गुरदास दासगुप्ता ने भी पुलिस-प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुये गृहमंत्री पी चिदंबरम को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि किशनजी के मुठभेड़ की कहानी फर्जी दिखाई पड़ती है, इसकी जांच की जरूरत है और सरकार को निश्चित रूप से सफाई देनी चाहिए.


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