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रिश्वत मांगी तो कार्यालय में सांप छोड़ दिया

रिश्वत मांगी तो कार्यालय में सांप छोड़ दिया

बस्ती. 1 दिसंबर 2011

सांप


बस्ती जिले की पुलिस पिछले दो दिनों से हर्रैया तहसील को सांपों से मुक्त कराने के लिये 50 साल के हक्कुल सपेरे को तलाश रही है. आरोप है कि हक्कुल ने ही तहसील में 50 से अधिक विषैले सांप छोड़ दिये हैं. सरकारी आश्वासनों से परेशान हो कर धरना, प्रदर्शन करना तो आम बात है लेकिन उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हर्रैया तहसील में हक्कुल नामक सपेरे की बात नहीं सुनी गई और रिश्वत के लिये परेशान किया जाने लगा तो उसने तहसील कार्यालय में बड़ी संख्या में खतरनाक सांप छोड़ दिये. खतरनाक और विषैले सांपों को देख कर लोगों में हड़कंप मच गया और कर्मचारी इधर-उधर भागने लगे.यह सब कुछ मंगलवार को हुआ था.

गौरतलब है कि चार पूर्व हर्रैया थाने के सामने बीच सड़क पर हक्कुल ने सैकड़ो सांपों को छोड़कर हाइवे जाम कर दी थी. हक्कुल ने उसी समय कहा था कि अगर जमीन नहीं मिली तो वे विधान सभा भवन में सांप छोड़ेंगे. इसके बाद वन विभाग ने उसके सैकड़ों सांपों को बस्ती वन बिहार में छुड़वाया था.

बताया जाता है कि दुबौलिया क्षेत्र के लारा गांव निवासी पचास वर्षीय हक्कुल पिछले कई सालों से जिले और आसपास के इलाके में सांप पकड़ने वाले के रुप में ख्यात हैं. इलाके में जहां कहीं भी कोई खतरनाक सांप नजर आता है, लोग सबसे पहले हक्कुल को याद करते हैं. पिछले कई सालों से हक्कुल अपनी जान पर खेल कर ऐसे सांपों को पकड़ते रहे हैं. उनके पास लगभग 300 सांप हैं.

इस काम के लिये हक्कुल को कई बार सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है. हक्कुल ने पिछले कई सालों में कई बार, सरकार से, पकड़े गये सांपों को सुरक्षित रखने के लिये ज़मीन की मांग की थी. सरकारी लोगों ने आश्वासन भी दिया. लेकिन यह आश्वासन पूरा नहीं हुआ. हक्कुल को ज़मीन देने संबंधी मामला छोटे कर्मचारियों ने फाइलों में उलझा कर रख छोड़ा था. कहा जाता है कि दफ्तर के बाबू उससे रिश्वत मांग रहे थे.

हक्कुल ने इस बारे में तहसील के बाबुओं से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार लगाई लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्हें यही रास्ता सुझा. इसके बाद हक्कुल पेटियों में बंद सांपों के साथ तहसील पहुंचे और बाबुओं से फिर ज़मीन को लेकर गुहार लगाई. लेकिन जब यह गुहार अनसुनी रह गई तो उन्होंने पेटी से निकाल कर सारे सांपों को कार्यालय में छोड़ दिया.

कार्यालय में खतरनाक और विषैले सांपों को देख कर बाबुओं की घिग्घी बंध गई. कुछ टेबल पर जा चढ़े तो कुछ कमरे से बाहर निकल कर एमएमएस बनाने लगे. बाद में वन विभाग की सहायता से 40 सांप तहसील कार्यालय से पकड़े गये. पुलिस हक्कुल की तलाश कर रही है कि वह छोड़े गये दूसरे सांपों को भी पकड़े, जिससे तहसील में काम करने वाले चैन की सांस ले कर काम कर सकें.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Amar [chandantelecom01@gmail.com] Shukulpura basti - 2012-09-19 08:34:29

 
  आप ने बहुत सही काम किया आपको बधाई 
   
 

arvind khan [arvindkhan1@gmail.com] Loni (GZB) - 2011-12-02 11:53:12

 
  इन सरकारी नौकरों को रिश्वत लेने में कभी भी शर्म नहीं आती है. ये एक आम हिंदुस्तानी का दर्द है.अगर अन्ना जी लोकपाल बिल की बात कर रहे है तो सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों को ही होता है. ऐसे लोग इसी तरह से अपना क्रोध प्रकट करेंगे. 
   
 

rakesh [gurubazarkatihar@gmail.com] delhi - 2011-12-02 11:40:00

 
  भारत में बस यही एक चारा है काम करने का क्योंकि यहां सब घुसखोर हैं. 
   
 

praveen singh [praveen.suryavansh@gmail.com] Hiyarupur Basti up - 2011-12-01 18:48:39

 
  Hakkul ji aap to anna ji ke contemporary ho. a little step against corruption.
tahnk u. 121 corore people ka aap ko
 
   
 

manoj singh [manojjunlist22@yahoo.com] lucknow - 2011-12-01 08:20:37

 
  हक्कुल ने सही किया क्योंकि भारतीय मशीनरी इसी के लायक है. 
   
 

Goldi [] gorakhpur - 2011-12-01 07:11:04

 
  जैसी करनी, वैसी भरनी. अब उन सांपो को बाबू खुद पकड़े. 
   
 

ANIL VERMA [anilverma4you@gmail.com] NEW DELHI - 2011-12-01 06:53:07

 
  ये भ्रष्टाचार खत्म करने का नया अंदाज है. सरकारी कर्मचारी इतने निकम्मे और भ्रष्टाचारी हो गये हैं कि आम आदमी का जीना दुश्वार हो गया है. इसको खत्म करने के लिये अब सरकार और आम जनता को जाग जाना चाहिये. 
   
 

P.Arora [arora.582@rediffmail.com] Allahabad - 2011-12-01 06:43:32

 
  He is right. I am proud of him.  
   
 

N. Prasad [n.prasad1944@yahoo.com] Bhopal - 2011-12-01 06:40:38

 
  हे ईश्वर, भारत के हर नागरिक को हक्कुल जैसा सपेरा बना दे ताकि देश से रिश्वतखोरी खत्म की जा सके.  
   
 

N. Prasad [n.prasad1944@yahoo.com] Bhopal - 2011-12-01 06:31:03

 
  विष को विष मारता है. हक्कुल ने विषैले तंत्र को विष से मारने का सही रास्ता चुना. अन्ना हज़ारे के आंदोलन का ये दूसरा रूप है. एक अनपढ़ आदमी और क्या कर सकता है. हक्कुल ने अपनी समझ से ठीक किया. उसे माफ किया जाना चाहिए यदि ये अपराध की श्रेणी में आता है तो. रिश्वतखोर भी तो इंसान है, उसे जिंदा रखेंगे तो देश जिंदा रहेगा. रिश्वतखोरों को सरकार के प्यादे बचा लेंगे किंतु इस गरीब को कौन बचाएगा.  
   
 

ramesh kumar [rameshprmar1972@gmail.com] Himachal pardesh - 2011-12-01 05:45:57

 
  बहुत अच्छा किया आपने हक्कुल साहब. अब आगे से ऐसे अधिकारी रिश्वत मांगने की जुर्रत नहीं करेंगे.  
   
 

ramesh [rameshsingh2020@gmail.com] noida - 2011-12-01 05:42:26

 
  Good, good, good. I am with u. 
   
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