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लोकपाल बिल शुक्रवार को पेश होगा

लोकपाल बिल शुक्रवार को पेश होगा

नई दिल्ली. 6 दिसंबर 2011

अभिषेक मनु सिंघवी


अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले तीन दिनों में लोकपाल बिल पेश किया जा सकता है. लोकपाल बिल के लिए गठित स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि शुक्रवार को लोकपाल बिल राज्यसभा में पेश हो सकता है.

गौरतलब है कि लोकपाल बिल का परीक्षण कर रही संसदीय समिति को 7 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी लेकिन स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने इसके लिये एक हफ्ते का समय मांगा था. उन्हें अब इसके लिये 4 दिन का और अतिरिक्त समय दिया गया है. इधर अन्ना हजारे ने कहा है कि लोकपाल बिल को पेश करने के लिये दबाव बनाने के उद्देश्य से 11 दिसंबर को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय उपवास करेंगे. टीम अन्ना ने इसमें भाग लेने के लिए सभी दलों के नेताओं को बुलाया है ताकि वे लोकपाल विधेयक पर अपने-अपने विचार रख सके.

अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लोकपाल बिल अपनी आत्मा की संतुष्टि और आम जनता के लिए बना रहे हैं, किसी व्यक्ति या संस्था के लिए नहीं. उन्होंने कहा कि 7 दिसंबर की बैठक में आम सहमति बनने के बाद रिपोर्ट के अनुवाद और बाइंडिंग में 2-3 दिन का वक्ता लग सकता है.

इधर सिंघवी ने बुधवार को विपक्षी सांसदों की ओर से दिए गए असहमति पत्रों के मद्देनजर समिति की बैठक बुलाई गई है. बैठक में प्रधानमंत्री और निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. कमेटी ने पहले ग्रुप-सी के 57 लाख कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में रखा. फिर बाहर कर दिया. पिछले हफ्ते हुई बैठक में समिति ने विधेयक पर मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया था, जिसमें ग्रुप सी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया था. लेकिन भाजपा और वाम दलों ने कुछ सिफारिशों पर आपत्ति जताई थी. समिति की शुरुआती मसौदा रिपोर्ट में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया था.

अनुमान लगाया जा रहा है कि लोकपाल बिल के लिए गठित स्टैंडिंग कमेटी अगर शुक्रवार को लोकपाल बिल पेश करती है तो सरकार इस पर विचार करेगी और इसमें फेरबदल पर चर्चा हो सकती है. हालांकि संसद का सत्र 22 दिसंबर तक है और अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार अगर चाहे तो भी इस बिल पर पर्याप्त बहस नहीं हो सकती. ऐसे में शीतकालीन सत्र में इसके पारित होने की संभावना कम ही है.


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