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बिहार में लोकायुक्त विधेयक पारित

बिहार में लोकायुक्त विधेयक पारित

पटना. 7 दिसंबर 2011

नीतीश कुमार


बिहार लोकायुक्त विधेयक 2011 को राज्य विधानसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है. इस विधेयक में राज्य के मुख्यमंत्री को भी लोकायुक्त के तहत रखा गया है. मतलब ये कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अब लोकायुक्त के दायरे में होंगे.

राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुसार लोकायुक्त मंत्री और सभी विधायकों के खिलाफ आरोपों की जांच कर सकेंगे. मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए लोकायुक्त के तीनों सदस्यों में सहमति जरूरी होगी. खास बात ये है कि निचले स्तर के कर्मचारी भी इसके दायरे में होंगे.

गौरतलब है कि टीम अन्ना ने इससे पूर्व के ड्राफ्ट पर ऐतराज जताया था. टीम अन्ना की आपत्ति थी कि लोकायुक्त का चयन मुख्यमंत्री की सदस्यता वाली कमेटी न करे. इसको ध्यान में रखते हुए विधेयक में चयन समिति में मुख्यमंत्री नहीं हैं. बिहार विधानपरिषद के चेयरमैन को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. लोकायुक्त के चयन के लिए पांच सदस्यीय समिति के संयोजक विधान परिषद के सभापति होंगे. इस समिति में बिहार विधानसभा अध्यक्ष, हाईकोर्ट से नामित उच्च न्यायालय के दो वरिष्ठ न्यायाधीश और निवर्तमान लोकायुक्त सदस्य होंगे.

यह पांच सदस्यीय समिति लोकपाल अध्यक्ष और अन्य दो सदस्यों की नियुक्ति करेगी. पेश होने वाले विधेयक के अनुसार लोकायुक्त में एक अध्यक्ष होगा और इसके दो सदस्य होंगे. तीन में से कम से कम दो न्यायिक सदस्य होंगे. बुधवार को पारित इस विधेयक के अनुसार लोकायुक्त को किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच के लिए सरकार से इजाजत नहीं लेनी होगी.


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