पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

काले धन वालों का नाम जाहिर नहीं करेगी सरकार

काले धन वालों का नाम जाहिर नहीं करेगी सरकार

नई दिल्ली. 14 दिसंबर 2011

प्रणव मुखर्जी


भारत सरकार ने कहा है कि विदेशी बैंकों में जिन भारतीयों का काला धन जमा है, उनका नाम जाहिर नहीं किया जायेगा. लोकसभा में बुधवार को विपक्ष द्वारा लाये गये स्थगन प्रस्ताव पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि विदेशों में इतने पैसे नहीं हैं, जितने बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं.

बुधवार को दोपहर बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने स्थगन प्रस्ताव लाते हुये कहा कि सरकार को काले धन के मामले में श्वेत पत्र जारी करना चाहिये. आडवाणी ने प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संबोधित करते हुये कहा कि दुनिया को ये बताइए कि हम इस मुद्दे पर सारी बात सामने रखना चाहते हैं. हमारे पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है. आपके पास जो नाम है वो उजागर किए जाएं. ये बड़ी शर्मनाक बात होगी कि हमें ये नाम अपने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से न पता चले बल्कि विकीलीक्स के जूलियन असांज से पता चले जिन्होंने कहा है कि वो 2012 में ये नाम उजागर कर देंगे.

इस मुद्दे पर कई दूसरे नेताओं ने भी अपनी राय रखी और सरकार से मांग की कि वह ऐसे लोगों का नाम जाहिर करे, जिनका काला धन विदेशों में जमा है. विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुये वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि जैसा दावा किया जा रहा है, उतना काला पैसा विदेशी बैंकों में जमा नहीं है. उन्होंने यह जरुर दावा किया कि भारत के किसी भी सांसद का काला धन किसी भी विदेशी बैंक में नहीं है, वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि हमने स्विस सरकार के साथ भी समझौता किया है ताकि हमें जानकारी मिले लेकिन वो समझौता स्विटज़रलैंड में अनुमोदित होने में समय लगेगा. हम उनके अनुमोदन के बिना नाम कैसे उजागर करें. ये बात सबको समझनी चाहिए. उन्होंने विपक्ष को समझाने की कोशिश करते हुये कहा कि स्विस बैंक से हमें कालाधन कैसे मिलेगा? क्या मुझे वहां फौज भेजनी चाहिए? यह सिर्फ कर समझौतों के जरिए हो सकता है. कर चोरी के पैसे जहां भी जमा हो रहे हैं वे विकासशील देश नहीं हैं, बल्कि विकसित देश हैं.

वित्त मंत्री ने कहा कि संसद इस मुद्दे पर बहस करे कि कैसे हम काले धन को टैक्स हैवेन में जाने से रोक सकते हैं. हम काले धन पर अंकुश लगाने के लिए पांच सूत्रीय कार्यक्रम को लागू कर रहे हैं. हमें जो भी जानकारी मिलेगी, उस पर हम कार्रवाई करेंगे.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

raghwendra sahu [raghwendrasahu@gmail.com] durg - 2011-12-15 16:19:51

 
  सरकार डर रही है की कहीं उसके चाहने वालों की लम्बी लिस्ट न बाहर आ जाये. और प्रणव दा ये कह कर सिर्फ दिलासा देने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेशों में ज्यादा काला धन जमा नहीं है. लोगों द्वारा सिर्फ खोखले दावे किये जा रहे हैं लेकिन मुद्दा ये नहीं है कि विदेशों में जमा काला धन ज्यादा है या कम. मुद्दा ये है कि हमारे देश से गैर क़ानूनी तरीकों से भ्रष्टाचार के द्वारा कमाई की गई रुपयों को किस तरह वापस लाया जाये और ऐसे काले कारनामे करने वालों के नाम न सिर्फ सार्वजनिक किये जाएँ बल्कि इन्हें उचित दंड भी दिया जाये ताकि बाकी लोगों को इससे सबक मिले. प्रणव दा ये कह कर मजाक जरुर कर रहें हैं कि हमारे देश के किसी भी सांसद का पैसा विदेशी बैंकों में जमा नहीं है. लेकिन पूरे देशवासी न सिर्फ जानतें हैं बल्कि पूरा विश्वास है कि सबसे ज्यादा पैसा हमारे देश के नेताओं का ही जमा है. सरकार ने ये सोच ही लिया है की किसी का भी नाम जाहिर नहीं किया जायेगा ऐसे में लोगों को शायद ही पता चले. और प्रणव दा इस मुगालते में रह सकतें हैं कि उनका दावा सही था.  
   
 

kammod Tyagi [kammodkumart@gmail.com] Agra - 2011-12-14 17:47:58

 
  सरकार को नाम तो बताना चाहिये. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in