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अब सचिन को भी मिल सकेगा भारत रत्न

अब सचिन को भी मिल सकेगा भारत रत्न

नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2011

सचिन तेंदुलकर


अब सामंती खेल क्रिकेट के शीर्ष खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी भारत रत्न दिये जाने का रास्ता साफ हो गया है. भारत सरकार ने भारत रत्न की नियमावली में ही फेरबदल कर दिया है और अब इस नागरिक सम्मान के दायरे में खिलाड़ियों को भी शामिल कर लिया गया है.

गौरतलब है कि कारपोरेट घरानों के अभियान के तहत सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिये जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है. यहां तक कि पिछले वर्ष इस मांग ने इतनी जोर पकड़ी कि भारत सरकार भारत रत्न को लेकर फैसला लेने में मुश्किल में पड़ गई. अब इस तरह की मांगों को पूरा किया जा सकेगा.

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुये खेल मंत्री अजय माकन ने कहा कि खेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय की पैरवी पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से एक अधिसूचना जारी कर भारत रत्न की नियमावली में यह बदलाव किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि इस नियम के बाद रन बनाने वाली मशीन सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिये जाने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि उन्होंने कहा कि भारत रत्न सम्मान किसे दिया जाये, यह प्रधानमंत्री तय करेंगे.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

RAJESH [rajeshraj.jnu@gmail.com] JNU, NEW DELHI - 2011-12-16 15:39:31

 
  मेरा मानना हैं, अगर खिलाड़ियों में से किसी को भारत रत्न देये जाने का प्रस्ताव भारत सरकार सोच रही है तो सबसे पहले मेजर धयानचंद को मिलना चहिये .... अगर ऐसा नहीं होता है और सचिन को ध्यानचंद से पहले भारत रत्न दिया जाता हैं तो इससे बड़ी शर्मनाक बात देश के लिए क्या हो सकती हैं....सरकार को याद रखना चहिये कि ये वही ध्यानचंद हैं जिन्होंने हिटलर जैसे तानाशाह के सामने हॉकी का मैच खेला और जर्मनी को पराजित कर दिया..... हिटलर को शक था कि उनके स्टिक में शायद कोई चुम्बक है, इस कारण उनका स्टिक बदलवा दिया था, लेकिन फिर भी हाकी के जादूगर ने जर्मनी को हरा दिया था.... जीतने के बाद हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मनी के तरफ से खेलने का प्रस्ताव रखा था, जिसे ध्यानचंद ने मना कर दिया था...... हॉकी के इस जादूगर ने देश को 8 बार ओलम्पिक में स्वर्ण पदक दिलवाया हैं... ध्यानचंद का कद सचिन से कई गुना ज्यादा बड़ा हैं ..... इसलिए पहले ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए न की सचिन को !!!  
   
 

Kunal Singh Rajput [] Bangalore - 2011-12-16 15:36:35

 
  क्रिकेट या कोई भी खेल जीतने के लिए पूरे टीम के योगदान की जरूरत होती है, कोई अकेला आपको मैच नही जीता सकता. सारा भारतवर्ष जानता है कि सचिन हमेशा ही देश के लिए खेलते आए हैं और खेलते रहेंगे. उन्होंने कभी अपने बारे में नही सोचा. इसके बाद भी कोई अगर उनको भारतरत्न न देने पर टिप्पणी करता है तो दुःख तो होता ही है साथ ही उस व्यक्ति के सोच पर हँसी आती है.  
   
 

amit singh [singh.singh228@gmail.com] kolkata - 2011-12-16 12:49:16

 
  मुझे लगता है कि सचिन के कारण ही ध्याचन्द जी को भी भारतरत्न पुरुस्कार देने की बात की जा रही है. जिस सरकार ने 67 सालों में ध्यानचन्द जी को भारतरत्न पुरुस्कार नहीं दिया, वो आज अचानक उन्हें देने की सोचती है, तो इस पर विचार करने की जरुरत है. सचिन का कुल जमा करियर 22 सालों का है, जो भारत रत्न के लिये योग्य हो गया और जिस ध्यानचंद ने देश के लिये राष्ट्रीय खेल हॉकी खेला और हिटलर जैसे तानाशाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, उन्हें आज 67 साल बाद भारत रत्न देने की बात हो रही है...सचिन ने केवल 1-2 मैच ही जीतवाए हैं. इन्होंने हमेशा अपने लिये खेला है. इनके कप्तानी के दाग को भी देख लें. इन सब को भुलाकर अगर ध्यानचंद जी की जगह सचिन को भारत रत्न देने की बात की जा रही है, तो क्या यह शर्मनाक नहीं है??? 
   
 

Harsh [] USA - 2011-12-16 12:44:56

 
  प्रधानमंत्री जी का बस चले तो सबसे पहले वे नेहरु-गांधी परिवार को ही भारत रत्न देने की मांग करेंगे. यहां पीएम के सोचने की बात ही नहीं है. ध्यानचंद और सचिन को एक साथ यह सम्मान मिलना चाहिये. 
   
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