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रामदेव समर्थकों पर लाठीचार्ज सुनियोजित था

रामदेव समर्थकों पर लाठीचार्ज सुनियोजित था

नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2011

बाबा रामदेव


रामलीला मैदान में 4 जून को बाबा रामदेव के समर्थकों पर पुलिस ने पहले से ही लाठी चार्ज करने और धावा बोलने की योजना बना रखी थी. केंद्र सरकार के नुमाइंदे और मंत्री एक ओर बाबा रामदेव के साथ समझौते की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर पुलिस को निर्देश दिया गया था कि वह बाबा रामदेव के अनशन को खत्म करने के लिये आवश्यक कार्रवाई करे.

ज्ञात रहे कि 4 जून की रात को रामलीला मैदान में अनशन कर रहे बाबा रामदेव की टीम पर पुलिस ने धावा बोलते हुये लाठी चार्ज कर लोगों को वहां से भगा दिया था और सलवार पहन कर भाग रहे बाबा रामदेव को हिरासत में ले लिया था. इस पूरे मामले पर रिपोर्ट के लिये सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्युरी यानी कोर्ट सलाहकार के तौर पर राजीव धवन की नियुक्ति की थी. राजीव धवन ने शुक्रवार को अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की.

राजीव धवन ने कहा कि पुलिस ने पहले से ही कार्रवाई तय कर रखी थी. पुलिस को यह निर्देश था कि वह रामदेव के समर्थकों पर आवश्यकतानुसार बल प्रयोग करे. इस सुनियोजित कार्रवाई के तहत ही पुलिस ने रामदेव समर्थकों पर लाठी चार्ज किया.

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि रामदेव के समर्थकों द्वारा ही रामलीला मैदान में लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काया जा रहा था और जब पुलिस बाबा के मंच पर पहुंचने की कोशिश करने लगी तो उनके समर्थक पुलिस पर पत्थर फेंकने लगे थे तो मजबूरन पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी.

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने इससे पहले कहा था कि बाबा रामदेव का प्रदर्शन देश के लिए खतरा बन गया था. ऐसे में बाबा को रामलीला मैदान छोड़ने को कहा गया क्योंकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 50 हजार तक पहुंच गई थी. अगर उन्हें नहीं रोका जाता तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी.

अखबारों में आ रही खबरों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही संज्ञान लेते हुये घटना के दो दिन बाद केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई और दिल्ली पुलिस आयुक्त बी के गुप्ता को नोटिस जारी कर पूछा था कि किन परिस्थितियों में रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान से जबरन हटाया गया.


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