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दिल्ली | वैश्वीकरण ने हिंदी के रास्ते खोले- राष्ट्रपति

वैश्वीकरण ने हिंदी के रास्ते खोले- राष्ट्रपति

नई दिल्ली. 15 सितंबर 2008



भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने हिंदी दिवस के अवसर पर रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हिंदी को और बढ़ावा देने की जरुरत है. उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण ने हिंदी को एक नई पहचान दी है.

 

इस अवसर पर ज्ञान विज्ञान पर मौलिक पुस्तक लेखन के लिए प्रतिष्ठित राजीव गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार, हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन के लिए इंदिरा गाधी राजभाषा पुरस्कार और केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिंदी में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार सहित 45 पुरस्कार प्रदान किए. इससे पहले राष्ट्रपति और गृह मंत्री श्री शिवराज सिंह पाटिल ने कल दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों की कड़ी निंदा की.

राष्ट्रपति ने कहा कि राजभाषा जब आम आदमी की भी भाषा होती है तो उसे और भी बढावा दिया जा सकता है. हिंदी की सरलता और अन्य भाषाओं से ग्रहण करने और उनको देने की प्रक्रिया इसे और लोकप्रिय बना सकती है. उन्होंने महसूस किया है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने हिंदी भाषा को पहचान दिलाने के नए मार्ग खोले हैं. हिंदी में उत्कृष्ट और प्रेरक साहित्य प्रदान करने के लिए लेखकों के साथ- साथ प्रकाशकों को भी विशिष्ट प्रयास करने चाहिए.

गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि सरकार देश विरोधी तत्वों की योजना कभी सफल नहीं होने देगी और शांति भंग करने के किसी भी प्रयास को नाकाम करने लिए कार्य करती रहेगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुए विस्फोटों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समुचित कार्रवाइ की जाएगी और प्रभावित लोगों को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराइ जाएगी.

गृहमंत्री ने कहा कि भाषा हमेशा ही एकसूत्र में पिरोने वाली शक्ति रही है. अधिकतर भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली और राजभाषा होने के नाते हिंदी को सरल बनाने और आसानी से अपनाने योग्य भाषा बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं. नए साफ्टवेयर का प्रारम्भ होने से हिंदी को और विकसित करने तथा बढावा देने में सहायता मिलेगी. उन्होंने कहा कि यह भाषा केवल तब ही सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकती है जब हमारे दिलों में इसके लिए पूरा सम्मान होगा. सरकार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा के रूप में पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है.

गृह राज्य मंत्री शकील अहमद ने स्वागत भाषण में कहा कि सरकार हिंदी को बढावा देने के लिए प्रयासरत है लेकिन यह लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब इस क्षेत्र में काम करने वाला हर व्यक्ति सहायता करे.