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छत्तीसगढ़ से 20 हजार लड़कियां भी लापता

छत्तीसगढ़ से 20 हजार लड़कियां भी लापता

रायपुर. 18 दिसंबर 2011

लापता लड़कियां


बेंगलुरु में भीख मंगवाने वाले गिरोह के चंगुल से मुक्त करवाए गए छत्तीसगढ़ के बच्चों के बाद अब छत्तीसगढ़ से पिछले कुछ साल में लापता लगभग बीस हजार आदिवासी लड़कियों का मामला गरमाने लगा है. राज्य के सरगुजा, रायगढ़, कोरिया और जशपुर इलाके से हर साल हजारों की संख्या में लड़कियों की प्लेसमेंट एजेंसी के नाम पर तस्करी होती रही है.

हाल ही में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने आरोप लगाया था कि पिछले आठ वर्षो के दौरान छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाके से बीस हजार से अधिक लड़कियों को दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरू और चेन्नई जैसे महानगरों में ले जाकर बेच दिया गया है. जोगी का आरोप था कि मानव तस्कर सरगुजा, रायगढ़ और जशपुर के इलाकों से भोली-भाली लड़कियों को नौकरी और प्रशिक्षण के नाम पर भगा कर ले जा रहे हैं.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही राजधानी रायपुर में बड़ी संख्या में आदिवासी लड़कियों को बरामद किया गया था. पिछले महीने ही जशपुर जिले में मानव तस्करी के आरोप में एक युवक को 14 आदिवासी लड़कियों के साथ गिरफ्तार किया गया था. लेकिन इनके अलावा जशपुर और सरगुजा इलाके के सैकड़ों गांवों की लड़कियां लापता हैं और पिछले कई सालों में भी पुलिस उन्हें तलाश नहीं पाई है.

दिल्ली में तकरीबन 200 प्लेसमेंट एजेंसियां है, जो छत्तीसगढ़ के सरगुजा, जशपुर के अलावा झारखंड के रांची, गुमला, पलामू आदि इलाकों से आदिवासी लड़कियों को घरेलू नौकरानी का काम दिलाने आकर्षित करती हैं. उनके निशाने पर हैं उरांव आदिवासी, जिनमें से अधिकांश ने यहां पर पिछले 5 दशकों से सक्रिय मिशनरियों के प्रभाव में आकर इसाई धर्म अपना लिया है.

ज्यादातर प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालक उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड के संदिग्ध प्रवृति के लोग हैं. पहले ये खुद आकर लड़कियों को तलाश कर ले जाते थे लेकिन पिछले दो साल से जब इनके खिलाफ अंचल में आवाज उठने लगी है तो उन आदिवासी लड़की लड़कों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो इन गांवों से पहले से ही निकलकर दिल्ली पहुंच चुके हैं. प्लेसमेंन्ट एजेंसियों ने स्वयंसेवी संगठनों और सरकारी विभागों की आंख में धूल झोंकने के लिए बहुत से नियम कायदे बना रखे हैं. जिनमें से एक यह भी है कि नाबालिग लड़कियों को काम पर नहीं रखा जायेगा. पर उनके निशाने पर 8 से 14 साल की लड़कियां ही हैं. प्लेसमेंट एजेंसियां चलाने वाले ऐसी लड़कियां लाने वाले दलालों को आने-जाने का खर्च और 5 से 15 हजार रूपये तोहफे के तौर पर देते हैं.


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