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खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंत्रिमंडल की हरी झंडी

खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंत्रिमंडल की हरी झंडी

नई दिल्ली. 18 दिसंबर 2011

सस्ता अनाज


गरीबों को सस्ते दरों पर अनाज मुहैय्या कराने के उद्देश्य से बनाये गये खाद्य सुरक्षा विधेयक को रविवार को मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है. इस विधेयक के पारित होने के साथ ही देश की 63 प्रतिशत आबादी को सस्ती कीमत पर अनाज मुहैय्या कराने का रास्ता एक हद तक साफ हो गया है.

इस विधेयक में सलाहकार परिषद का सुझाव था कि प्राथमिकता वाले परिवारों को बाजरा एक रुपया प्रति किलो, गेहूं दो रुपया प्रति किलो और चावल तीन रुपये प्रति किलो की सब्सिडी की दर से 35 किलो की मासिक हकदारी मिलनी चाहिये. इसके अलावा आम परिवारों को बाजरे, गेहूं और चावल के मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य के 50 प्रतिशत या इससे कम मूल्य पर 20 किलो की मासिक हकदारी देने का सुझाव भी प्रस्तावित किया गया था.

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सुझाव था कि खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत पहले चरण में खाद्य हकदारी का विस्तार 85 प्रतिशत ग्रामीण जनता और 40 प्रतिशत शहरी जनता तक किया जाना चाहिये. खाद्य हकदारी के तहत 31 मार्च 2014 तक सभी को शामिल किया जाना चाहिये.

इस कानून के लागू होने के बाद सरकार का खाद्य सब्सिडी पर खर्च 27,663 करोड़ रुपये बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये सालाना हो जाएगा. इस पर अमल के लिए खाद्यान्न की जरूरत मौजूदा के 5.5 करोड़ टन से बढ़कर 6.1 करोड़ टन पर पहुंच जाएगी.

इस कानून का लाभ पाने वाली ग्रामीण आबादी की कम से कम 46 प्रतिशत आबादी को ‘प्राथमिकता वाले परिवार’ की श्रेणी में रखा जाएगा जो मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ये गरीबी रेखा से नीचे के परिवार कहे जाते हैं. शहरी क्षेत्रों की जो आबादी इसके दायरे में आएगी उसका 28 प्रतिशत प्राथमिकता वाली श्रेणी में होगा.

विधेयक के तहत प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति सात किलो मोटा अनाज, गेहूं या चावल क्रमश: एक, दो और तीन रुपये किलो के भाव पर सुलभ कराया जाएगा. यह राशन की दुकानों के जरिये गरीबों को दिए जाने वाले अनाज की तुलना में काफी सस्ता है. मौजूदा पीडीएस व्यवस्था के तहत सरकार 6.52 करोड़ बीपीएल परिवारों को 35 किलो गेहूं या चावल क्रमश: 4.15 और 5.65 रुपये किलो के मूल्य पर उपलब्ध कराती है.

सामान्य श्रेणी के लोगों को कम से कम तीन किलो अनाज सस्ते दाम पर दिया जाएगा जिसका वितरण मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य के 50 फीसद से अधिक नहीं होगा. वर्तमान में गरीबी रेखा से ऊपर के 11.5 परिवारों को कम से कम 15 किलो गेहूं या चावल क्रमश: 6.10 और 8.30 रुपये किलो के भाव पर उपलब्ध कराया जाता है.

इस विधेयक में बेसहारा और बेघर लोगों, भुखमरी और आपदा प्रभावित व्यक्तियों जैसे विशेष समूह के लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इसके अलावा इसमें गरीब गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान काराने वाली माताओं और बच्चों के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था का प्रावधान है. गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान काराने वाली माताओं को पौष्टिक अधिकार का अधिकार दिलाने के अलावा उन्हें छह माह तक 1000 रुपए प्रति माह की दर से मातृका लाभ भी दिया जाएगा. साथ ही आठवीं कक्षा तक के बच्चों को भी भोजन सुलभ कराने का प्रावधान किया जाएगा.

खाद्य मंत्रालय ने अनाज उत्पादन बढाने के लिए 1,10,600 करोड रूपए के निवेश और समन्वित वाल विकास सेवा के लिए 35,000 करोड़ रुपए के प्रावधान का सुझाव दिया है. विशेष समूहों के लिए भोजन की व्यवस्था पर सालाना 8,920 करोड़ रुपए और मातृका लाभ योजना पर 14,512 करोड़ रुपए का खर्च आएगा. यह बोझ केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर उठाएंगी. महिलाओं को अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए इस योजना के तहत राशन कार्ड परिवार की सबसे बड़ी महिला के दाम जारी करने का प्रस्ताव है.

विधेयक में यह महत्वपूर्ण प्रावधान भी किया गया है कि सूखा या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के कारण अनाज की कमी होने पर संबंधित राज्यों को नकद भुगतान करेगा. व्यक्ति को उसके हक के अनुसार सस्ता अनाज सुलभ न होने की स्थिति में राज्य सरकार पर उसे ‘खाद्य सुरक्षा भत्ता’ देना होगा. शिकायतों के निवारण के लिए जिला शिकायत निवारण अधिकारी, राज्य खाद्य आयुक्त और राष्ट्रीय खाद्य आयुक्त के कार्यालय बनाए जाएंगे. विधेयक के मसौदे में जिला शिकायत निवारण अधिकारी की सिफारिश का अनुपालन न करने वाले सरकारी कर्मचारी पर 5,000 तक के अर्थदंड का प्रावधान किया है.


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