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मायावती का 4 राज्य बनाने का प्रस्ताव केंद्र ने ठुकराया

मायावती का 4 राज्य बनाने का प्रस्ताव केंद्र ने ठुकराया

नई दिल्ली. 20 दिसंबर 2011

मायावती


बसपा सुप्रीमो मायावती की सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने कई आपत्तियों के साथ बैरंग लौटा दिया है. केंद्र ने मायावती से इन बंटवारों के कारण और उनकी परिस्थिति को लेकर जवाब मांगा है.

गौरतलब है कि 21 नवंबर को ही मायावती की सरकार ने उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने का विधेयक विधानसभा से पारित करवा कर उसे केंद्र को भेजा था. ये चार नये प्रस्तावित राज्य थे अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम प्रदेश.

20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में फिलहाल 75 जिले हैं. राज्य सरकार द्वारा पारित विधेयक के अनुसार उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में 24 जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव था, जिसमं वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और बस्ती जैसे इलाके हैं. इसी तरह बुंदेलखंड में झांसी, महोबा, बांदा, हमीरपुर, ललितपुर और जालौन समेत 11 जिले हैं. पश्चिम प्रदेश में आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली हैं, जबकि अवध में देवीपाटन, फ़ैज़ाबाद, इलाहाबाद, लखनऊ और कानपुर जैसे राज्य के महत्वपूर्ण इलाके रखे गये थे.

अब जबकि केंद्र सरकार द्वारा बसपा सरकार का यह प्रस्ताव ही वापस भेज दिया है, ऐसे में लगता नहीं है कि उत्तर प्रदेश में नये राज्यों के निर्माण का मामला जल्दी सुलझ पायेगा.

केंद्र सरकार ने मायावती से प्रस्तावित राज्यों की राजधानियां और नये राज्यों की सीमाओं जैसे 9 सवाल पूछे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कर्जे से जुड़ा हुआ है. पिछले साल उत्तर प्रदेश का कर्जा 1 लाख 80 हजार करोड़ था और माना जा रहा है कि अगले साल कर्जे की यह रकम दो लाख चार हजार करोड़ रुपये पहुंच सकती है.


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