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छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी बेंगलूरू में भीख मांगेगी

छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी बेंगलूरू में भीख मांगेगी

रायपुर. 20 दिसंबर 2011

रमन सिंह


छत्तीसगढ़ की सरकार का एस्सार के प्रति प्रेम और खनिज संसाधनों की लूट का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में हंगामे की वजह बना रहा. नक्सलियों की मदद करने के आरोपी एस्सार पर कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर पहले भी विधानसभा में विपक्ष ने वाकआउट किया था. अब विपक्ष ने एस्सार द्वारा अनुमति से अधिक पेड़ों की कटाई का मामला उठाया और सरकार इस मुद्दे पर ठीक-ठीक जवाब नहीं दे पाई. विपक्ष के विधायक ने खनिजों के उत्खनन के मुद्दे पर कहा कि यही हाल रहा तो छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी बेंगलूरू में जाकर भीख मांगेगी.

विधानसभा में कांग्रेस विधायक मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया कि एस्सार ने अपनी पाइपलाइन बिछाने के दौरान अवैध तरीके से हजारों पेड़ काट डाले और सरकार ने जब्त किये गये वाहनों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना कर अपने कार्य का निर्वहन कर लिया गया.

मोहम्मद अकबर ने रमन सिंह सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि प्रदेश का कुल क्षेत्रफल एक लाख 36 हजार वर्ग किलोमीटर है, जबकि 61 हजार 669 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए रेकोनेंस परमिट की अनुशंसा कर दी गई है. मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को करप्शन हब बना दिया है. उन्होंने कहा कि देश का 16 प्रतिशत खनिज उत्पादन छग में होता है. यहां हीरा, बॉक्साइट, आयरन ओर और चूनापत्थर के भंडार हैं, लेकिन सबसे खराब स्थिति इसी विभाग की है. बेतहाशा माइनिंग लीज, पूर्वेक्षण लाइसेंस और रेकोनेंस परमिट जारी होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं कि इसमें गलत क्या है, उन्होंने कहा कि खनिज के भंडार हैं, तो उसे आने वाली पीढ़ी के लिए भी रखना चाहिए, नहीं तो आने वाली पीढ़ी बेंगलूरू में जाकर भीख मांगेगी.

अकबर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में खनिजों की बंदरबाट में पसंद की कंपनियों के लिए कई-कई खदानों की अनुशंसाएं की गई हैं. इस्पात गोदावरी, प्रकाश इंडस्ट्रीज, नवभारत फ्यूज, मोनेट इस्पात, पुष्प स्टील, जायसवाल निको और रायपुर एलॉयज का नाम गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इनके लिए राज्य सरकार ने कई-कई खदानों की अनुशंसाएं की हैं. सरकार इन कंपनियों पर मेहरबान रही है. प्रकाश इंडस्ट्रीज ने 4 हजार करोड़ के कोयले की ब्लैक मार्केटिंग की है. इस बारे में जब मुख्यमंत्री से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि अपात्र कम्पनियों को भी खदानों की अनुशंसाएं की गईं. कांग्रेस के 34 विधायकों ने पुष्प स्टील कंपनी के खिलाफ राज्यपाल के पास शिकायत की थी, इसके बावजूद यह कंपनी लीज लेने में कामयाब रही और उसके 915 हेक्टेयर की लीज का अनुमोदन भी हो गया है.

अकबर ने कहा कि 2008 का चुनाव परिणाम आने से पहले जब राज्य में सरकार बनने को लेकर संशय की स्थिति थी, उस समय बालको कंपनी ने कवर्घा के सेमासाटा खदान से 2 लाख 58 हजार टन, अर्थात 15 हजार ट्रक बाक्साइट का अवैध उत्खनन किया, जबकि कंपनी को दो हजार टन खनन की अनुमति है. कंपनी ने 27 लाख 352 टन और तीन लाख 269 टन का खनन प्रति वर्ष किया. अवैध उत्खनन कर इन खनिजों को वेदांता के ओडिशा स्थित फैक्ट्री में खपाया गया, जबकि राज्य शासन ने इसके उपयोग की अनुमति राज्य की बालको फैक्ट्री में करने के लिए दी थी. कंपनी के दो अधिकारियों गुंजन गुप्ता और एससी साव के खिलाफ परिवाद पत्र पेश किया गया था. दोनों ने न्यायालय में स्वीकार किया कि उन्होंने निर्घारित से ज्यादा मात्रा में खनन करवाया. बालको के अफसरों में इतनी हिम्मत सिर्फ राज्य सरकार के संरक्षण के कारण आई. उन्होंने टाटा स्टील और एस्सार कंपनी का भी मामला उठाया. और कहा कि एस्सार कंपनी ने नक्सलियों की मदद की, लेकिन उसके बावजूद उनका एमओयू निरस्त नहीं किया गया है.


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