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13 लाख लोग अब भी ढोते हैं मानव मल

13 लाख लोग अब भी ढोते हैं मानव मल

नई दिल्ली. 20 दिसंबर 2011

मल ढोने वाली किरण


देश में अभी भी मानव मल ढोने की प्रथा बरकरार है और ऐसे लोगों की संख्या 13 लाख के आसपास है. विपक्ष के इन आरोपों के बाद सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक ने लोकसभा में स्वीकार किया कि ऐसे लोगों के प्रति समाज संवेदनशील नहीं है.

लोकसभा में सवालों का जवाब देते हुये मुकुल वासनिक ने कहा कि सरकार मल ढोने वालों की तादाद की सही जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक समिति का गठन करेगी. सरकार की मंशा है कि इससे उनके लिए योजनाएं तैयार करने और उन्हें उसका फ़ायदा पहुंचाने में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और दिल्ली में कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के अंतर्गत सीवर तथा सैप्टिक कामगारों को अधिसूचित कर दिया है. सरकार ने इस सिलसिले में पहले ही राज्यों को सलाह दी है कि वो मल ढोने वालों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दें. ऐसा दावा किया गया है कि मल ढोने वालों की कुल तादाद 13 लाख है लेकिन राज्यों से आई जानकारी के अनुसार उनकी संख्या 1.16 लाख है.

मुकुल वासनिक ने स्वीकार किया कि गांव और शहरों में जब गटर में इन्हें जाना होता है तो इन्हें शराब पिला दी जाती है और कई बार तो ऐसी स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो जाती है.


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