पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > राज्य > दिल्ली Print | Send to Friend 

जीपीएफ घोटाले में सरकार से जवाब तलब

जीपीएफ घोटाले में सरकार से जवाब तलब

नई दिल्ली. 17 सितंबर 2008


उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एमके शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या केंद्र सरकार गाजियाबाद न्यायाधीश जीपीएफ घोटाले की सीबीआई से जांच कराने के लिए तैयार है? ज्ञात रहे कि इस घोटाले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पहले ही सीबीआई जांच कराने संबंधी कार्रवाई शुरु कर दी है.

उत्तर प्रदेश के इस बहुचर्चित जीपीएफ घोटाले में 2002 से 2007 के दौरान फर्जी तरीके से सात करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे. इस मामले में जब जांच शुरु हुई तो सबसे पहले खजांची आशुतोष अस्थाना को गिरफ्तार किया गया. जिसने विशेष न्यायाधीश रमा जैन के समक्ष दिए बयान में कहा कि इस घोटाले में 36 न्यायाधीश शामिल हैं.

 

7 करोड़ रुपए के इस घोटाले में उच्चतम न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश, इलाहाबाद और उत्तराखंड हाईकोर्ट के 11 न्यायाधीश और गाजियाबाद के 24 जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम लाभ पाने वालों की सूची में दर्ज किए गए. गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने घोटाले की रकम 23 करोड़ बताई है.

पूर्व केंद्रीय विधि मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण, ट्रांस्पेरेंसी इंटरनेशनल और गाजियाबाद जिला बार एसोसिएशन ने इस घोटाले को लेकर अलग-अलग याचिका दायर की थी और मांग की थी पूरे मामले की सीबीआई जांच की जाए. आज दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सोलिसिटर जनरल जीई वाहनवती को निर्देश दिया कि वे केंद्र सरकार का पक्ष न्यायालय के सामने रखें.

न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एमके शर्मा की पीठ ने सात करोड़ रुपये के इस घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर कल सोलिसिटर जनरल जीई वाहनवती को केंद्र से इस संबंध में दिशानिर्देश प्राप्त कर न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया।


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in