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जीपीएफ घोटाले में सरकार से जवाब तलब

जीपीएफ घोटाले में सरकार से जवाब तलब

नई दिल्ली. 17 सितंबर 2008


उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एमके शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या केंद्र सरकार गाजियाबाद न्यायाधीश जीपीएफ घोटाले की सीबीआई से जांच कराने के लिए तैयार है? ज्ञात रहे कि इस घोटाले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पहले ही सीबीआई जांच कराने संबंधी कार्रवाई शुरु कर दी है.

उत्तर प्रदेश के इस बहुचर्चित जीपीएफ घोटाले में 2002 से 2007 के दौरान फर्जी तरीके से सात करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे. इस मामले में जब जांच शुरु हुई तो सबसे पहले खजांची आशुतोष अस्थाना को गिरफ्तार किया गया. जिसने विशेष न्यायाधीश रमा जैन के समक्ष दिए बयान में कहा कि इस घोटाले में 36 न्यायाधीश शामिल हैं.

 

7 करोड़ रुपए के इस घोटाले में उच्चतम न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश, इलाहाबाद और उत्तराखंड हाईकोर्ट के 11 न्यायाधीश और गाजियाबाद के 24 जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम लाभ पाने वालों की सूची में दर्ज किए गए. गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने घोटाले की रकम 23 करोड़ बताई है.

पूर्व केंद्रीय विधि मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण, ट्रांस्पेरेंसी इंटरनेशनल और गाजियाबाद जिला बार एसोसिएशन ने इस घोटाले को लेकर अलग-अलग याचिका दायर की थी और मांग की थी पूरे मामले की सीबीआई जांच की जाए. आज दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सोलिसिटर जनरल जीई वाहनवती को निर्देश दिया कि वे केंद्र सरकार का पक्ष न्यायालय के सामने रखें.

न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एमके शर्मा की पीठ ने सात करोड़ रुपये के इस घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर कल सोलिसिटर जनरल जीई वाहनवती को केंद्र से इस संबंध में दिशानिर्देश प्राप्त कर न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया।


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