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लोकपाल को संवैधानिक दर्जे में कांग्रेसी ही बागी

लोकपाल को संवैधानिक दर्जे में कांग्रेसी ही बागी

नई दिल्ली. 28 दिसंबर 2011

लोकपाल को संवैधानिक दर्जा


लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने के लिये पेश किया गया संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में खारिज होने के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर हड़कंप मचा हुआ है. कांग्रेस पार्टी समझ नहीं पा रही है कि आखिर यह कैसे हुआ. सहयोगी दलों की छोड़ें, कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने भी अपनी पार्टी का साथ नहीं दिया. लोकसभा में कांग्रेस के पास 275 सांसद हैं और संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए उसे 273 की संख्या ही चाहिए थी. लेकिन वह इतने सांसद भी नहीं जुटा सकी.

गौरतलब है कि मंगलवार को लोकसभा में लोकपाल विधेयक पारित हो गया लेकिन राहुल गांधी द्वारा दिये गये सुझाव के अनुसार इसे संवैधानिक दर्जा दिये जाने के लिये पेश किया गया संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में खारिज हो गया.

इधर लोकपाल को संवैधानिक दर्जा नहीं मिलने के बाद अब विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की है. विपक्ष ने कहा कि सरकार अपना विश्वास खो चुकी है, इसलिये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नैतिक आधार पर अपने पद पर बने रहने का हक नहीं है. भाजपा के वरिष्ठ नेता नेता यशवंत सिन्हा ने कहा सरकार को नैतिक ज़िम्मेदारी के तहत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं. सिन्हा ने कहा कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव खुद राहुल गांधी का था. उनका सपना टूट गया है. ये दिखाता है कि सरकार इस मसले पर खुद अपने दायरे में कितनी कमज़ोर है.

कांग्रेस पार्टी और सरकार भी इस मुद्दे पर भौंचक है कि आखिर ऐसे कैसे हो गया. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक दुख भरा दिन है. हालांकि अपनी झेंप मिटाने की कोशिश करते हुये उन्होंने इसके ले भाजपा को जिम्मेवार ठहराते हुये कहा कि भाजपा लोकपाल के लिए मुस्तैदी दिखाते हुए सदन में कहती कुछ और लेकिन करती कुछ और है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद गुरुदास दास गुप्ता ने कहा कि सरकार को असल में आईना देखकर इस बात का एहसास करना चाहिए कि वो ज़रूरी बहुमत क्यों नहीं जुटा पाई. उन्होंने लोकपाल विधेयक के लोकसभा में पारित होने पर कहा कि सरकार का लोकपाल मजबूत कानून नहीं बल्कि उसका मखौल है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

rakesh kumar jha [rakesh.khelari@gmail.com] ranchi - 2011-12-28 07:37:50

 
  संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए विपक्ष ने भी कोई विशेष प्रयास नहीं किया. हमेशा विरोध की भूमिका निभाना जरूरी नहीं है. प्रश्न देशहित और लोकपाल से संबंधित हो तो सार्थक भूमिका निर्वाहन भी आवश्यक हो जाता है. 
   
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