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चित्रा मुद्गल को अंतरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान

चित्रा मुद्गल को अंतरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान

मास्को. 31 दिसंबर 2011

चित्रा मुद्गल


मानवीय सरोकारों की पैरोकार हिन्दी की जानी-मानी लेखिका चित्रा मुद्गल को रूस का अंतरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान-2009 दिए जाने की घोषणा की गई है.

गौरतलब है कि रूस के 'भारत मित्र समाज' की ओर से प्रतिवर्ष हिन्दी के एक प्रसिद्ध लेखक-कवि को मास्को में हिन्दी-साहित्य का यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है. उल्लेखनीय है कि पहली बार यह सम्मान किसी महिला लेखिका को मिला है.

भारत मित्र समाज के महासचिव अनिल जनविजय ने बताया कि प्रसिद्ध रूसी कवि अलेक्सान्दर सेंकेविच की अध्यक्षता में हिन्दी साहित्य के रूसी अध्येताओं व विद्वानों की पाँच सदस्यीय निर्णायक-समिति ने चित्रा मुद्गल को वर्ष 2009 के अंतरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान के लिए चुना है. इस निर्णायक-समिति में हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध रूसी विद्वान ल्युदमीला ख़ख़लोवा, रूसी कवि अनातोली पारपरा, कवयित्री और हिन्दी साहित्य की विद्वान अनस्तसीया गूरिया, कवि सेर्गेय स्त्रोकन और लेखक व पत्रकार स्वेतलाना कुज़्मिना शामिल थे. सम्मान के अन्तर्गत चित्रा मुद्गल को पन्द्रह दिन की रूस-यात्रा पर बुलाया जाएगा. उन्हें रूस के कुछ नगरों की साहित्यिक-यात्रा कराई जाएगी तथा रूसी लेखकों से उनकी मुलाक़ातें आयोजित की जाएँगी.

मूल रूप से मानवीय संवेदना के पक्ष में खड़ी नज़र आने वाली लेखिका चित्रा मुद्गल का जन्म 10 दिसम्बर 1943 को चेन्नई में हुआ था और अब तक उनके नौ कहानी संग्रह, तीन उपन्यास और संपादन की छह पुस्तकों सहित विविध विधाओं की कुल 41 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.

इस भरी-पूरी साहित्यिक सम्पदा वाली लेखिका चित्रा मुद्गल की अंतरराष्ट्रीय ख्याति का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी अनेक पुस्तकों का चेक, इतालवी, स्पेनिश, चीनी और नेपाली सहित कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है. मराठी, बंगाली, मलयालम, पंजाबी, कन्नड़, उर्दू, गुजराती, तमिल, असमिया आदि भारतीय भाषाओं में भी उनकी पुस्तकों का अनुवाद बहुत पहले ही हो चुका है.

चित्रकला में गहरी रुचि रखने वाली चित्रा मुद्गल ने जे० जे० स्कूल ऑफ़ आर्टस से फ़ाइन आर्टस का अध्ययन किया और पढ़ाई के दौरान श्रमिक नेता दत्ता सामंत के संपर्क में आकर श्रमिक आंदोलन से भी जुड़ीं, जहाँ उन्होंने उत्पीड़न और बदहाली में जीवन-यापन करने वाली महिलाओं के उत्थान और बुनियादी अधिकारों के साथ-साथ दलित, उत्पीड़न और निम्नवर्ग के उत्थान के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया.

हिन्दी साहित्य के अनेक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित चित्रा मुद्गल, के के बिड़ला फाउंडेशन का तेरहवाँ व्यास सम्मान पाने वाली प्रथम लेखिका हैं. 2010 में चित्रा मुद्गल को उदय राज सिंह सम्मान और तमिलनाडु का चिन्नप्पा भारती सम्मान से भी सम्मानित किया गया है.

चित्रा मुद्गल से पहले यह सम्मान हिन्दी के कवि विश्वनाथप्रसाद तिवारी, उदयप्रकाश, लीलाधर मंडलोई, आलोक श्रीवास्तव, बुद्धिनाथ मिश्र, पवन करण, कहानीकार हरि भटनागर और महेश दर्पण आदि को दिया जा चुका है. चित्रा मुद्गल इन दिनों दिल्ली में रहती हैं और उनसे 09873123237 पर संपर्क किया जा सकता है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

संध्या पेडणेकर [sandhyaship@gmail.com] दिल्ली - 2012-01-04 14:18:15

 
  बहुत बहुत बधाई, चित्राजी। 
   
 

बलराम अग्रवाल [] दिल्ली - 2012-01-01 17:05:28

 
  मेरे लिए नए वर्ष में पहली अच्छी खबर है। उम्मीद करता हूँ कि यह साल ऐसी ही अच्छी खबरें देता रहेगा। पूश्किन सम्मान के लिए चित्रा जी का चयन उचित निर्णय है। आपको साधुवाद और आ॰ चित्रा जी को बधाई। 
   
 

Meethesh Nirmohi [] Jodhpur[Rajasthan]Bharat - 2011-12-31 13:01:56

 
  निर्णय को ह्रदय की अटल गहराइयों से स्वागत. चित्रा जी को हार्दिक बधाईयां. 
   
 

व्ही.व्ही.रमण किरण [raman.kiran@yahoo.com] बिलासपुर,छग - 2011-12-31 11:23:53

 
  यह पढ़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है कि चित्रा मुद्गल को अंतर्राष्ट्रीय पुश्किन सम्मान प्राप्त हुआ है.इसमें मेरे लिए आश्चर्य जैसा कुछ भी नहीं है लेकिन नए वर्ष के आगमन की पूर्व संध्या पर खुशी व्यक्त करने का बहाना जरूर मिल गया है. वे करीब चौदह—पंद्रह साल पहले जब मैंने मैंने पत्रकारिता शुरू भी नहीं की थी तो अपने मित्र मोहनिश महापात्र की दीदी और प्रख्यात लेखिका डॉ. स्नेहा मोहनीश की किताब \'जवां कुसुम\' का विमोचन करने आई थी.उन्हें मैंने \'सृजन\' के सचिव के पद पर रहते आमंत्रित किया था. पहली बार उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई थी और आज उन्हें इस सम्मान के लिए चुने जाने पर मैं जैसे गदगद हो गया.मेरी किताब \'मर्म का अन्वेषण\' का विमोचन करने वाले गजलकार आलोक श्रीवास्तव को भी यह सम्मान इसी वर्ष मास्को में प्रदान किया गया था.एक ही वर्ष में मेरे लिए खुश होने का दूसरा अवसर है.रविवार को जानकारी देने के ​लिए आभार और चित्रा दीदी को बहुत—बहुत शुभकामनाएं. 
   
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