पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > राजनीति > महाराष्ट्र Print | Send to Friend 

मुंबई किसी के बाप की नहीं- में अपमानजनक क्या ?

मुंबई किसी के बाप की नहीं- में अपमानजनक क्या ?

मुंबई. 19 सितंबर 2008


मुंबई हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर मुंबई किसी के बाप की नहीं है, ऐसा कहना किस तरह अपमानजनक है ?

 

गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संयुक्त पुलिस आयुक्त ,कानून व्यवस्था के एल प्रसाद की उस टिप्पणी पर मुहर लगा दी, जिसमें उन्होंने बच्चन परिवार के सदस्यों द्वारा अभिनीत फिल्मों के प्रदर्शन की इजाजत नहीं देने की राज ठाकरे की धमकी की प्रतिक्रिया में कहा था कि मुंबई किसी के बाप की नहीं है, यहां देश के सभी नागरिकों को सम्मान के साथ रहने का अधिकार है.

के एल प्रसाद के बयान को अपमानजनक बताते हुए वकील वीवी पाटिल ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में के एल प्रसाद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. याचिका में कहा गया था कि प्रसाद शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रभारी हैं पर उन्होंने खुद कानून के दायरे से बाहर जाकर बयान दिया है.

अदालत ने कहा कि संयुक्त पुलिस आयुक्त,कानून व्यवस्था के एल प्रसाद की टिप्पणी अपमान की परिभाषा से मेल नहीं खाती. अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता चाहे तो इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. इसके बाद याचिकाकर्ता पाटिल ने अपनी याचिका वापस ले ली.

ज्ञात रहे कि प्रसाद के बयान के बाद राज ठाकरे ने कहा था कि प्रसाद अपनी वर्दी उतार कर सड़क पर आएं तो मुंबई की जनता बता देगी कि मुंबई किसके बाप की है. उधर शिव सेना के बाल ठाकरे ने भी अपने अखबार सामना में संपादकीय लिखते हुए कहा था कि सभी पुलिस अधिकारियों को सरकार की ओर से यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह मीडिया को केवल मराठी में संबोधित करें.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in