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मायावती को चाहिये रंगीन रातें और पैसा

मायावती को चाहिये रंगीन रातें और पैसा

लखनऊ. 4 जनवरी 2012

मायावती


उत्तर प्रदेश में चुनावी रंग इस कदर चढ़ गया है कि कल के दोस्त आज के दुश्मन बन गये हैं. भाषा और शब्द सीमा पार करने लगे हैं. कल तक बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मंत्री रहे अवधेश कुमार वर्मा ने गंदे तरीके से आरोप लगाया है कि मायावती को राज्य या सरकार की चिंता नहीं है. उन्हें केवल दो ही चीजें चाहिए एक रंगीन रातें और दूसरा पैसा.

अवधेश कुमार वर्मा बसपा के वही मंत्री हैं, जिनकी टिकट बसपा ने काट दी थी. पार्टी से टिकट कटने के बाद पहले तो वर्मा ने सार्वजनिक तौर पर दहाड़ मार-मार कर रोना-धोना मचाया, जानना चाहा कि ‘बहन जी’ ने उन्हें बाहर का रास्ता क्यों दिखाया. उन्होंने कहा कि बसपा ने मुझे ईमानदारी की सजा दी है. राजनीति इतनी गंदी होगी, नहीं जानता था. आत्महत्या करने का भी मन हुआ, किंतु लोगों ने हौसला दिया.

लेकिन एक दिन पहले भाजपा की टिकट मिलने के बाद अब वे बसपा सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ ही आग उगलने लगे हैं. ददरौल विधानसभा से भाजपा की टिकट मिलने के बाद उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो को अच्छे लोग पसंद नहीं हैं. उन्हें केवल चाटुकार लोग चाहिये. मायावती को केवल रंगीन रात और पैसे चाहिये.

गौरतलब है कि राज्य में अलग-अलग पार्टियों के दागी लोग अपने-अपने हिस्से की गंगोत्री तलाश ले रहे हैं. खासतौर पर भाजपा और रालोद ऐसे लोगों की पसंदीदा जगह हैं. अवधेश कुमार वर्मा, ददन मिश्रा, बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह जैसे लोगों की एक पूरी फौज ऐसी है, जिन्हें उनकी पार्टियों ने भ्रष्टाचार या अपराध के कारण बाहर का रास्ता दिखाया और भाजपा ने उन्हें मान सम्मान के साथ अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. ऐसे लोगों को भाजपा ने अपनाने के साथ ही पार्टी का टिकट देने की भी घोषणा की.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Mritunjay Tripathi [] New Delhi - 2012-01-04 07:56:02

 
  आज जनता काफी जागरूक हो चुकी है। अत: स्‍वार्थवश दिए गये बयान के समय भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। आपकी भाषा ही जनता के बीच आपके चरि‍त्र को उजागर करती है। चार वर्ष तक जिस नेतृत्‍व में कार्य किया, आज अपना स्‍वार्थ पूरा न होने पर ऐसी भाषा का इस्‍तेमाल हम कहीं से भी ठीक नहीं मानते हैं। खैर जनता सब देख रही है। 
   
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