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बाबू सिंह कुशवाहा पर भाजपा में घमासान

बाबू सिंह कुशवाहा पर भाजपा में घमासान

नई दिल्ली. 4 जनवरी 2012

बाबू सिंह कुशवाहा


एनआरएचएम घोटाले में फंसे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी के बाद भाजपा की हालत सांप-छुछुंदर जैसी हो गई है. एक तरफ पार्टी में उन्हें लेकर विवाद चल रहा था, उपर से सीबीआई की बाबू राम कुशवाहा के घर और दफ्तर समेत लगभग 60 ठिकानों पर छापेमारी ने पार्टी की और दुर्गति करवा दी.

कहा जाता है कि सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नेता पहले ही हजारों करोड़ रुपये के एनआरएचएम घोटाले में फंसे कुशवाहा को भाजपा में शामिल करने के खिलाफ थे, फिर बुधवार को सीबीआई की छापेमारी ने उनके विरोध को और बल दे दिया. जाहिर है, ऐसे में विपक्ष को भी मौका मिलना ही था, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तुरंत ट्विट किया- बीएसपी के कलंक, बीजेपी के तिलक. बीजेपी ने बसपा के दागी मंत्रियों को अपनाया और टिकट दिया. यह बीजेपी का असली चाल, चरित्र और चेहरा है.

बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर पार्टी शुरु से सांसत में थी. लेकिन पार्टी में शामिल करने के बाद उनकी रक्षा भी पार्टी को जरुरी लगा. भाजपा प्रवक्तास मुख्तार अब्बास नकवी ने सीबीआई के ही दुरुपयोग का आरोप लगाते हुये कहा कि एनआरएचएम घोटाले के तार मायावती से जुड़े हुये हैं. भाजपा ने इस घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तादवेज सीबीआई को दिए लेकिन केंद्र के निर्देश पर ये दस्तावेज गायब कर दिए गए. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी भाजपा में शामिल हुआ है, उसे पार्टी टिकट देगी, ऐसा जरुरी नहीं है. उन्होंने कांग्रेस-बसपा के बीच महाडील के भी आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि कुशवाहा को पार्टी में सामुहिक निर्णय के बाद शामिल किया गया था.

उधर भाजपा चुनाव समिति की बैठक से पहले भाजपा नेता विजय बहादुर पाठक ने यह तो नहीं कहा कि एनआरएचएम घोटाले में फंसे बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी टिकट देगी या नहीं लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर सवाल जरुर जड़ दिया कि जब तक बाबू सिंह कुशवाहा बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मंत्री थे, तब तक सीबीआई ने उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भ्रष्टम व्य क्ति का समर्थन नहीं करेगी और कानून को अपना काम करने देना चाहिए.

कुछ समय पहले ही भाजपा के ही वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने बाबू सिंह कुशवाहा के एनआरएचएम घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुये बसपा की मायावती सरकार पर हमला बोला था लेकिन कुछ ही दिनों के बाद बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा ने ही गले लगा लिया. जाहिर है, कांग्रेस के नेताओं ने अगर भाजपा को भ्रष्टाचारियों की धर्मशाला और करप्शन की गंगोत्री जैसे विशेषण दे दिये तो वह अकारण नहीं था. जिन-जिन लोगों को मायावती की सरकार ने भ्रष्टाचार के कारण पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें से कई लोगों को भाजपा ने ही अपने यहां शरण दी. कहा जाता है कि भाजपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को ओबीसी वोटों के लोभ में पार्टी में शामिल किया था.


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