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फेसबुक पर लिखा तो 6 महीने की जेल

फेसबुक पर लिखा तो 6 महीने की जेल

ढाका. 4 जनवरी 2012

मोहम्मद रुहुल अमीन खांडकर


बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ टिप्पणी करने वाले एक प्रोफेसर को अदालत ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है. बांग्लादेश के जहांगीरनगर विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर काम करने वाले मोहम्मद रुहुल अमीन खांडकर ने पिछले दिनों अपने फेसबुक की वॉल पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के मौत की कामना करने वाली एक पोस्ट डाली थी.

उच्च न्यायालय की ए एचएम शम्शुद्दीन चौधरी माणिक और जस्टिस जहांगीर हुसैन की खंडपीठ ने रुहुल की सजा पर मुहर लगाई और सरकार को आदेश दिया है कि वे यथाशीघ्र रुहुल की स्वदेश वापसी के लिये आवश्यक राजनयिक कदम उठायें. अदालत ने पुलिस को भी रुहुल की वतन वापसी के साथ ही गिरफ्तारी के आदेश दिये हैं. विश्वविद्यालय को भी अदालत ने नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं.

खांडकर पर आरोप है कि सुप्रसिद्ध फिल्मकार तारिक मसूद और पत्रकार अशफाक मुनीर मिशूक की अगस्त में सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उन्होंने अपने फेसबुक के वाल पर लिखा था कि बांग्लादेश में जब इतने लोग सड़क दुर्घटना में मर रहे हैं तो प्रधानमंत्री शेख हसीना क्यों नहीं मर जातीं. "सभी लोग मर रहे हैं, हसीना क्यों नहीं", फेसबुक पर उनके इस संदेश का काफी विरोध हुआ और सत्ताधारी पार्टी आवामी लीग के छात्र संगठन ने उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर काफी धरना-प्रदर्शन भी किया था.

इसके बाद रुहुल खांडकर के खिलाफ अदालत ने खुद से ही संज्ञान लेते हुये रुहुल को दो सप्ताह में जवाब देने के आदेश दिये. इसके बाद फिर ढ़ाका की उच्च न्यायालय ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया से बांग्लादेश लौटने का आदेश दिया. रुहुल वहां अध्ययन के लिये गये हुये हैं. लेकिन रुहुल ने अदालत के समन को गंभीरता से नहीं लिया. अब अदालत का कहना है कि रुहुल ने अदालत की अवमानना की है, इसलिये उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुये उन्हें 6 महीने के जेल की सजा सुनाई गई है.