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बाबू सिंह कुशवाहा की होगी गिरफ्तारी ?

बाबू सिंह कुशवाहा की होगी गिरफ्तारी ?

नई दिल्ली. 5 जनवरी 2012

बाबू सिंह कुशवाहा


लगभग दो हजार करोड़ रुपये के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी एनआरएचएम घोटाले में तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर गिरफ्तारी की तलवार मंडरा रही है. सीबीआई ने जिस तरीके से इस घोटाले में कुछ अफसरों की गिरफ्तारी की है, उसके बाद बाबू सिंह कुशवाहा पर भी फंदा कस सकता है.

गौरतलब है कि बसपा की सरकार में मायावती की नाक के बाल माने जाने वाले बाबू सिंह कुशवाहा को हत्या और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद मायावती ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके अलावा उन्हें पार्टी से भी बाहर निकाल दिया था. जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. इधर 15 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब सीबीआई ने अपनी जांच शुरु की तो उसने लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बजट में हुये घोटाले में बाबू सिंह कुशवाहा की भूमिका को प्रमुख माना. माना जा रहा है कि इस बड़े बजट से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है.

इधर भारतीय जनता पार्टी के लिये भी बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल करना सरदर्द बना हुआ है. बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर पार्टी शुरु से सांसत में थी. लेकिन पार्टी में शामिल करने के बाद उनकी रक्षा भी पार्टी को जरुरी लगा. भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने सीबीआई के ही दुरुपयोग का आरोप लगाते हुये कहा कि एनआरएचएम घोटाले के तार मायावती से जुड़े हुये हैं. भाजपा ने इस घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तादवेज सीबीआई को दिए लेकिन केंद्र के निर्देश पर ये दस्तावेज गायब कर दिए गए. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी भाजपा में शामिल हुआ है, उसे पार्टी टिकट देगी, ऐसा जरुरी नहीं है. उन्होंने कांग्रेस-बसपा के बीच महाडील के भी आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि कुशवाहा को पार्टी में सामुहिक निर्णय के बाद शामिल किया गया था.

कुछ समय पहले ही भाजपा के ही वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने बाबू सिंह कुशवाहा के एनआरएचएम घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुये बसपा की मायावती सरकार पर हमला बोला था लेकिन कुछ ही दिनों के बाद बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा ने ही गले लगा लिया. जाहिर है, कांग्रेस के नेताओं ने अगर भाजपा को भ्रष्टाचारियों की धर्मशाला और करप्शन की गंगोत्री जैसे विशेषण दे दिये तो वह अकारण नहीं था. जिन-जिन लोगों को मायावती की सरकार ने भ्रष्टाचार के कारण पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें से कई लोगों को भाजपा ने ही अपने यहां शरण दी. कहा जाता है कि भाजपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को ओबीसी वोटों के लोभ में पार्टी में शामिल किया था.

अब बुधवार और गुरुवार को बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ जिस तरह से छापेमारी की गई, उसके कारण कुशवाहा के साथ-साथ भाजपा की भी परेशानी बढ़ी हुई है.


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