पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >उ.प्र. Print | Share This  

भाजपा की सदस्यता स्थगित रखेंगे कुशवाहा

भाजपा की सदस्यता स्थगित रखेंगे कुशवाहा

नई दिल्ली. 7 जनवरी 2012

बाबू सिंह कुशवाहा


बसपा से निकल कर भाजपा की गंगोत्री में शामिल हुये बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा है कि जब तक वे अपने को बेदाग नहीं साबित कर देंगे, तब तक वे भाजपा की सदस्यता स्थगित रखेंगे. उन्हें शामिल करने के बाद से आलोचना की शिकार भाजपा ने बाबू सिंह कुशवाहा के इस कदम के बाद राहत की सांस ली है.

गौरतलब है कि बसपा की सरकार में मायावती की नाक के बाल माने जाने वाले बाबू सिंह कुशवाहा को हत्या और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद मायावती ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके अलावा उन्हें पार्टी से भी बाहर निकाल दिया था. जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. इधर 15 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब सीबीआई ने अपनी जांच शुरु की तो उसने लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बजट में हुये घोटाले में बाबू सिंह कुशवाहा की भूमिका को प्रमुख माना. माना जा रहा है कि इस बड़े बजट से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है.

ऐसे में बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर पार्टी शुरु से सांसत में थी. कुछ समय पहले ही भाजपा के ही वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने बाबू सिंह कुशवाहा के एनआरएचएम घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुये बसपा की मायावती सरकार पर हमला बोला था लेकिन चार दिनों के बाद बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा ने ही गले लगा लिया. लेकिन उनके पार्टी में लाने के साथ ही नीचे से लेकर ऊपर तक भाजपा में विरोध के स्वर तेज हो गये. सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुख्तार अब्बास नकवी, एसएस अहलूवालिया जैसे नेता पहले ही हजारों करोड़ रुपये के एनआरएचएम घोटाले में फंसे कुशवाहा को भाजपा में शामिल करने के खिलाफ थे. इसके बाद मेनका गांधी, योगी आदित्यनाथ, किर्ती आजाद के साथ-साथ उमा भारती ने भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर की थी.

अब बाबू सिंह कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी की पर्याप्त आलोचना के बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को पत्र लिख कर कहा है कि उनके भाजपा से जुडने के निर्णय को अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाया जा रहा है. उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि राजनीतिक षडयंत्र के कारण उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार और सीबीआई के जरिए केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है.

कुशवाहा ने अपने पत्र में कहा है कि जिन विवादों में उनका नाम घसीटा जा रहा है, उनमें वह निर्दोष हैं और वह किसी भी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने को तैयार हैं. अब तक उनके खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही उनका कोई आपराधिक इतिहास रहा है.

नितिन गडकरी को लिखे पत्र में कुशवाहा ने कहा है कि मेरे पिछड़े वर्ग के आरक्षण में साढ़े चार प्रतिशत को अल्पसंख्यकों के वोट बैंक के लालच में छीने जाने के षडयंत्र को उजागर करने के मेरे विरोध के स्वर को दबाने हेतु मुझ पर हमले किए जा रहे हैं.

बाबू सिंह कुशवाहा ने भाजपा की सदस्यता के मुद्दे पर पत्र में कहा है कि वे नहीं चाहते कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार के आरोपों के परिणामस्वरूप भाजपा को अनावश्यक विवाद का कारण बनाया जाए. ऐसे में जब तक उनके ऊपर लगे आरोपों की सच्चाई के संबंध में उचित निवारण न हो जाए तब तक वे भाजपा की अपनी सदस्यता को स्थगित रखेंगे.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in