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प्रभा खेतान का निधन

वरिष्ठ लेखिका प्रभा खेतान नहीं रहीं

कोलकाता. 20 सितंबर 2008


सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. प्रभा खेतान नहीं रहीं. 66 वर्षीय प्रभा खेतान ने कल देर रात कोलकाता में अंतिम सांस ली. दो दिन पहले ही उन्हें सांस में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शुक्रवार को उनकी बाईपास सर्जरी की गई थी, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई.

1 नवंबर 1942 को जन्मी प्रभा खेतान ने आओ पेपे घर चलें, पीली आंधी, अपरिचित उजाले, छिन्नमस्ता, बाजार बीच बाजार के खिलाफ, उपनिवेश में स्त्री जैसी रचनाओं से हिंदी जगत में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई थी.

 

सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ ने उन्हें स्त्री विमर्श की पैरोकार के तौर पर पहचान दी. कुछ समय पहले आई उनकी आत्मकथा 'अन्या से अनन्या' को लेकर भी हिंदी साहित्य में विमर्श का एक सिलसिला शुरु हुआ था.

 

कोलकाता के व्यवसायी जगत में भी प्रभा खेतान ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई थी. वे कोलकाता चेंबर ऑफ कामर्स की पहली महिला अध्यक्ष भी रही थीं.

उनकी अंत्येष्टि रविवार को कोलकाता के नीमतल्ला घाट में संपन्न होगी.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ratna (drvermar@gmail.com)

 
 प्रभा खेतान चुप- चाप चली गई. छिनमस्त्ता, अहिल्या और पीली आंधी जैसी रचना देने वाली तथा सिमोन द बोउवा की पुस्तक ‘दि सेकेंड सेक्स’ के अनुवाद ‘स्त्री उपेक्षिता’ के जरिये नारी मन की थाह तक पहुचने वाली एक महान रचनाकार का जाना बेहद दुखद है. अपनी आत्मकथा अन्या से अनन्या के जरिये तो उन्होंने स्त्री विमर्श के लिए एक नई बहस की शुरुआत की थी. इतना ही नहीं सामाजिक आडम्बरों पर करार प्रहार करते हुए अपनी आत्मकथा के मध्यम से उन्होंने जो बेबाकपन दिखाया था वह सिर्फ़ प्रभा खेतान ही कर सकतीं थीं .
उन्हें मेरी विनम्र श्रद्धांजली.
- रत्ना वर्मा


 
   
 

aloka (safdar.aloka@gmail.com)

 
 प्रभा खेतान के निधन से हम शोक में हैं. 
   
 

Shambhu Choudhary(ehindisahitya@gmail.com )

 
 कवयित्री, उपन्यासकार और नारीवादी-अस्तित्ववादी चिन्तक डॉ.प्रभा खेतान से गत सप्ताह ही मेरी मुलाकात हुई थी। आप चाहती थी कि इनका सारा साहित्य यूनिकोड में परिवर्तित कर इनके सभी प्रकाशन को इन्टरनेट के पाठकों को उपलब्ध करा दिया जाय। इस क्रम में उनसे दो-तीन बार फोन पर बात भी हुई। अंतिम बार जब वे हॉस्पीटल में थी तब आप से बात हुई थी। आज जब समाचापत्र देखा तो एकदम से हम सभी दंग रह गये। इनके जीवन जीने का ठंग एक दम से अलग हट कर था। संपन्न परिवार में जन्म लेने के बाद भी आपने अपने आस पास कभी संपन्नता को प्रदर्शित नहीं होने दिया। प्रभा खेतान फाउन्डेशन की संस्थापक अध्यक्षा, नारी विषयक कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदारी रही, फिगरेट नामक महिला स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना, 1966 ई. में, 1976 से चमड़े तथा सिले-सिलाए वस्त्रों का निर्यात, अपनी कंपनी 'न्यू होराईजन लिमिटेड' की प्रबंध निदेशिका, हिन्दी भाषा की लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार, कवियित्री तथा नारीवादी चिंतक का इस तरह चले जाने से हिन्दी साहित्य जगत को काफ़ी क्षत्ति हुई है। ई-हिन्दी साहित्य सभा की तरफ से आपको अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि 
   
 

मुकेश पोपली(mukesh11popli@gmail.com)

 
 बहुत ही दुःख भरा समाचार है, उनकी अन्या से अनन्या के अभी पूरी भी नहीं कर पाया.
इश्वर से प्रार्थना है की उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और हम सभी साहित्य प्रेमियो को ये दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे.
मुकेश पोपली
 
   
 

sudha (sudhaarora@gmail.com)

 
 Vishwas nahin ho raha . Abhi 3 maheene pehle Kolkata me mulaqat hui .Itni sakriya aur zindadil theen Prabhaji . Unka lekhan hi ab hamari thati hai . Prabhaji hamesha yaad aayengi .  
   
 

nisha bhosle(nishabhosle_kavita@rediffmail.com)

 
 prabha ji ke nidhan ka samachar pada.bahut dukh hua. sahitya jagat me bahut badi kshti hui hai.
 
   
 

कविता वाचक्नवी

 
 शोक की घड़ी है। ईश्वर उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करे। 
   
 

अनूप सेठी

 
 प्रभा जी के निधन का समाचार पढ़ा पर भरोसा नहीं हो रहा. अगर यह सच है तो बहुत बुरा हुआ.  
   

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