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भारत में कुपोषण पर मनमोहन सिंह शर्मिंदा

भारत में कुपोषण पर मनमोहन सिंह शर्मिंदा

नई दिल्ली. 10 जनवरी 2012

मनमोहन सिंह


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कुपोषण की समस्या पूरे देश के लिए शर्म की बात है. सकल घरेलू उत्पाद में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बावजूद देश में कुपोषण का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. उन्होंने माना कि सरकार की योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं.

मंगलवार को दिल्ली में भूख और कुपोषण यानी हंगर एंड मैलन्यूट्रिशन पर एक रिपोर्ट जारी करते हुये मनमोहन सिंह ने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए उन जिलों पर ध्यान केन्द्रित किये जाने की जरूरत है, जहां परिस्थितिवश कुपोषण जारी है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सफाई सुविधाओं की कमी है.

हंगामा रिपोर्ट जारी करते हुये उन्होंने कुपोषण को राष्ट्रीय शर्म का मामला बताया और कहा कि सकल घरेलू उत्पाद में शानदार वृद्धि के बावजूद हमारे देश में कुपोषण का स्तर बहुत ज्यादा है, जो स्वीकार्य नहीं है. अगली पीढ़ी को भावी शिक्षक, किसान, डाटा ऑपरेटर, दस्तकार और सेवा प्रदाता बताते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और समाज की भलाई के लिए अगली पीढ़ी का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता प्रकट की कि देश के 42 प्रतिशत बच्चे जन्म के समय कम वज़न वाले होते हैं, जो कुपोषण का संकेत है. उन्होंने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के बारे में कहा कि वे चिंताजनक भी हैं और उत्साहित करने वाले भी. इस सिलसिले में उन्होंने अपनी अध्यक्षता वाली भारतीय पोषण चुनौतियों संबंधी राष्ट्रीय परिषद की पिछली बैठक की चर्चा की और कहा कि इस परिषद ने स्थिति में सुधार के लिए एक कार्य योजना बनाने का फैसला किया था, जिसके अनुसार 200 पिछड़े जिलों में बहुक्षेत्री कार्यक्रम शुरू किये जाएंगे.


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