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मित्र संवाद का आयोजन

मीडिया और साहित्य-संस्कृति के बीच संवाद जरुरी

अखिल भारतीय संस्कृति पत्रकार संघ का 'मित्र संवाद' संपन्न

 

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2008


वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण ने कहा है कि मीडिया और साहित्य-संस्कृति के बीच संवाद जरुरी है. साहित्यिक-सांस्कृतिक रिपोर्टिंग के पीछे प्रशिक्षित पत्रकारिता होनी चाहिए. हिंदी में कई अखबारों के संपादकों ने इस ओर खास ध्यान दिया है पर टेलिविज़न अभी सोया हुआ है. सांस्कृतिक पत्रकारों का संगठन इस दिशा में नई जागरुकता पैदा करेगा. कुंवर नारायण पिछले दिनों इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में नव-प्रस्तावित अखिल भारतीय संस्कृति पत्रकार संघ द्वारा आयोजित 'मित्र संवाद' में बोल रहे थे.

mitra samvad


इस अवसर पर लंदन से आए कथा यूके के महासचिव कथाकार तेजेंद्र शर्मा ने अपनी कहानी कब्र का मुनाफा का अभिनय पाठ किया. यह कहानी लंदन में बसे दक्षिण एशियाई मुस्लिम समाज में मृत्यु का एक नया विमर्श सामने लाती है. जीवन में बाजार की घुसपैठ इस कदर हो गई है कि अंतिम संस्कार जैसे पवित्र रीति-रिवाजों का भी व्यापार होने लगा है. यह एक बड़े दृष्टिकोण की कहानी है, जो खिलंदड़े अंदाज में मृत्यु जैसे गंभीर और डरावने विषय को उत्सव में बदल देती है.

सुप्रसिद्ध लेखक कृष्ण बलदेव वैद ने कहा कि ऐसा संगठन बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था. इसके माध्यम से कई काम किए जा सकेंगे. उन्होंने सुझाव दिया कि इस संगठन को सरकार के बदले कॉरपोरेट और व्यवसायिक घरानों से साधन जुटाने चाहिए.

ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी ने कहा कि सांस्कृतिक पत्रकारों को सबसे पहले खुद को प्रशिक्षित करने का काम करना चाहिए. उन्होंने सांस्कृतिक पत्रकारों को सुझाव दिया कि वे घुसपैठ की गुरिल्ला रणनीति अपना कर सांस्कृतिक खबरों को अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर जगह दिलाने का काम करें. श्री वाजपेयी ने कहा कि कला संस्कृति की समीक्षा एक तकनीकी मामला है और ललित कलाओं, सिनेमा, रंगमंच, नृत्य, संगीत की समीक्षा के लिए तकनीकी ज्ञान जरुरी है.


तेजेंद्र शर्मा की कहानी को सशक्त और अंत तक बांधे रखने वाली कहानी बताते हुए उन्होंने कहा कि कहानी का अभिनय पाठ एक अद्भुत नाटकीयता को सामने लाता है.

हंस के संपादक राजेंद्र यादव ने सांस्कृतिक पत्रकारों के इस संगठन को एक नई पहल बताते हुए कहा कि इससे सांस्कृतिक खबरों के क्षेत्र में फैली अराजकता कुछ कम होगी. उन्होंने तेजेंद्र शर्मा की कहानी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कब्र का मुनाफा एक अनोखे विषय को खास तरह की नाटकीयता के साथ गहराई से देखने की कोशिश है और इस कहानी को सुनने के बाद लगा कि कहानी पढ़ना भी एक सांस्कृतिक समाचार है.

वरिष्ठ कथाकार असगर वजाहत ने इंदू शर्मा कथा सम्मान प्राप्त करने के दौरान अपने अनुभवों को दर्शकों से साझा किया. उज्जैन के रंगकर्मी शरद वर्मा ने हिंदी पत्रकारिता में कुशल सांस्कृतिक पत्रकारों की कमी का मुद्दा उठाया.

अखिल भारतीय सांस्कृतिक पत्रकार संघ के संयोजक अजित राय और गीताश्री ने घोषणा की कि भारतीय फिल्म एवं टेलिविजन संस्थान पुणे की तरह ललित कला अकादमी और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से मीडिया कर्मियों के लिए प्रतिवर्ष कला एवं रंगमंच की समीक्षा का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने की पहल की जाएगी. वाणी प्रकाशन के अरुण माहेश्वरी और सामयिक प्रकाशन के महेश भारद्वाज ने सुझाव दिया कि इस संगठन को विस्तृत रुप दिया जाए.

वरिष्ठ पत्रकार अरुण आदित्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया.


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