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दूध नहीं पानी में भी जहर

दूध नहीं पानी में भी जहर

नई दिल्ली. 11 जनवरी 2012

पानी


देश भर में मिलावटी दूध पर हंगामा मचा हुआ है और दूध के नाम पर बिकने वाले जहर के लेकर सरकार जांच की बात कह रही है लेकिन हालत ये है कि देश की बहुसंख्य आबादी को शुद्ध पानी भी नसीब नहीं है. देश की अधिकांश आबादी जहर वाला पानी पी रही है और सरकार इस दिशा में आंखें बंद किये हुये है.

नदियों से आने वाले नगर निगम के पानी की हालत तो और भी खराब है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि देश भर में हर दिन लगभग 3 अरब 30 करोड़ लीटर मल-जल निकलता है, लेकिन केवल 21 प्रतिशत ऐसे पानी को ही शुद्ध कर पाना संभव है.

देश की राजधानी दिल्ली का हाल ये है कि लोक स्वास्थ्य विभाग ने कुछ समय पहले दिल्ली जल-बोर्ड द्वारा आपूर्ति किए जा रहे पानी के 616 नमूने जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला में भेजे थे. इस जांच में पाया गया कि लोगों के घरों में दिल्ली नगर निगम जिस पानी की आपूर्ति कर रहा है, उसमें मल जल या नाली का पानी मिला हुआ है.

गंगा और जमुना नदियों का हाल ये है कि इनके बारे में सरकार भी मानती है कि इन नदियों का पानी नहाने लायक भी नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में 30 से 40 फीसदी लोगों की मौत प्रदूषित जल के कारण होती है। देश के 20 राज्यों के लगभग 7 करोड़ लोग फ्लोराइड के कारण बीमार हैं, वहीं एक करोड़ से अधिक लोग आर्सेनिक के कारण धीमी मौत मर रहे हैं.

बोतलों में बंद पानी को लेकर भी सीएसई की रिपोर्ट आ चुकी है. बोतलबंद पानी में भी कीटनाशकों की भयावह मात्रा में उपस्थिति पाई गई है. इसके अलावा अधिकांस बोतलबंद पानी को शुद्ध किया ही नहीं जाता.


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