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संजीवनी बूटी मिलने का दावा

संजीवनी बूटी मिलने का दावा

नई दिल्ली. 28 सितंबर 2008


योग गुरु बाबा रामदेव के योग न्यास ने संजीवनी बूटी को ढूंढ निकालने का दावा किया है. संजीवनी बूटी का वैज्ञानिक नाम सेलाजिनेला ब्राहपटेर्सिस है और इसकी उत्पत्ति लगभग तीस अरब साल पहले कार्बोनिफेरस युग से मानी जाती हैं. इस औषधि का जिक्र रामायण में मिलता है.

बाबा रामदेव की संस्थान का कहना है कि यह बूटी उन्हें उत्तराखंड के द्रोणगिरि पर्वत पर मिली है, जो चमोली जिले में है.संस्थान से संबद्ध आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इस बूटी में मृत संजीवनी, विषल्य कर्णी, स्वर्ण कर्णी और संधानी के गुण हैं. बालकृष्ण के अनुसार संजीवनी में कई बूटियां होती हैं और इसमें से दो बूटियों का नाम फेनिकमल और बियांड रखा गया है.

हालांकि उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने साफ किया है कि इस तरह के दावे पर कोई टिप्पणी करना जल्दीबाजी होगी. उन्होंने कहा कि जब हिमालय में द्रोण पर्वत है ही नहीं तो यहां संजीवनी बूटी का पौधा कैसे तलाश लिया गया ?

संजीवनी बूटी के बारे में बताया जाता है कि यह सूख जाने के बाद भी थोड़ी नमी मिलते ही वापस अपने स्वरुप में आ जाती है. लखनऊ स्थित वनस्पति अनुसंधान (एनबीआरआई) के वैज्ञानिक भी पिछले कुछ दिनों से इसके विशिष्ट जीन की पहचान करने के लिए अध्ययन कर रहे हैं.


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